नगर में उपवास व्रत महिलाओं ने गोवर्धन नाथ मंदिर गौशाला पर जाकर पूजा की

बागली: गोवर्धन नाथ मंदिर की पुजारी राजेंद्र पाठक ने बताया कि बछ बारस (गोवत्स द्वादशी) का पावन व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और मंगल कामना के लिए रखती हैं।
महत्व और पौराणिक कथा
संतान की रक्षा यह व्रत संतान के सुखी जीवन और कष्टों से मुक्ति के लिए रखा जाता है।गौ सेवा इस दिन गाय और बछड़े की पूजा की गई। हिंदू धर्म में गाय को माता और सभी देवी-देवताओं का वास माना गया है।श्रीकृष्ण की लीला मान्यता है, कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण पहली बार गऊ चराने (बछड़ों को लेकर) घर से बाहर गए थे।
मुख्य नियम जो जरूर ध्यान रखें
धारदार वस्तुओं का त्याग:* चाकू, कैंची या धारदार वस्तु से कटी फल-सब्जी का प्रयोग वर्जित है।गेहूं का सेवन नहीं:* भोजन में गेहूं और जौ का प्रयोग नहीं किया जाता।
दूध-दही के नियम। गाय के दूध, दही या घी का सेवन नहीं किया जाता, यह बछड़े का हिस्सा माना जाता है। भैंस या बकरी के दूध का प्रयोग कर सकते हैं।विशेष आहार: अंकुरित अनाज (मूंग, मोठ, चना) और बाजरे का प्रसाद चढ़ाया और खाया जाता है।

बागली नगर में भी कुछ स्थानों पर जहां लघु गौशाला संचालित हो रही है वहां पर महिलाएं पहुंची और गाय बछड़े की पूजा की वार्ड क्रमांक 3 में स्थित वाग योग्य चेतना पीठ आश्रम पर भी महिलाओं ने गाय बछड़े की पूजा की पंडित कनिष्क द्विवेदी ने बताया कि सनातन धर्म में हर सजीव एवं निर्जीव वस्तु को पूजा जाता है जो हमारे काम आती है। और गाय को तो हमारी माता के रूप में ही पूजा जाता है। यह सब पर्व हमारे पूर्वज इसलिए ही मानते आए हैं की प्रकृति और संस्कृति साथ-साथ बची रहे। वर्तमान में गोवंश हत्या कानून लगु होने से गाय माता की सुरक्षा हो रही है।

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