इंदौर: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर में सोमवार को शिक्षक दिवस मनाया गया. समारोह में शिक्षण, विद्यार्थियों के मार्गदर्शन और भावी पीढ़ी के निर्माण में योगदान देने वाले संकाय सदस्यों को सम्मानित किया गया. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई के प्रोफेसर एमेरिटस और पद्मश्री से सम्मानित प्रोफेसर जुजेर वासी मुख्य अतिथि रहे.
समारोह में वर्ष 2026 के श्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार प्रदान किए गए. बड़े बैच वर्ग में प्रोफेसर राजेश कुमार, मध्यम बैच वर्ग में डॉ. स्वामीनाथन रामाबद्रन और छोटे बैच वर्ग में डॉ. विजय ए.एस. को श्रेष्ठ शिक्षक चुना गया. वहीं उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले डॉ. दिब्येंदु मंडल, डॉ. कैलाशम रामालिंगम और प्रो. तुषार कांति मुखर्जी को भी सम्मानित किया गया. विभिन्न सेमेस्टर में शिक्षण के क्षेत्र में निरंतर योगदान के लिए प्रोफेसर अभिनव क्रांति को मानद पुरस्कार दिया गया.
एआई के दौर में शिक्षण पर चर्चा
कार्यक्रम में ‘एआई के युग में कक्षा शिक्षण’ विषय पर समूह चर्चा हुई। प्रोफेसर किरण बाला, प्रो. तुषार कांति मुखर्जी और डॉ. विजय ए.एस. ने विचार रखे, जबकि डॉ. ईश्वर प्रसाद कोरिमिल्ली ने संचालन किया. चर्चा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण कक्षा शिक्षण, सीखने की प्रक्रिया और विद्यार्थियों की सहभागिता में हो रहे बदलावों पर विचार किया गया. इस अवसर पर संस्थान की पुस्तिका ‘कैंपस म्ेस्ट’ और पूर्व छात्र एवं कॉर्पोरेट संबंध कार्यालय के समाचार पत्र ‘पॉड पल्स’ का विमोचन भी किया गया.
शोध के ज्ञान शिक्षण में शामिल करें
निदेशक प्रो. सुहास जोशी ने शिक्षण में नवाचार और प्रभावी पद्धतियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया. उन्होंने शिक्षक प्रशिक्षण को मजबूत करने तथा शोध से प्राप्त ज्ञान को कक्षा शिक्षण में शामिल करने की आवश्यकता बताई. मुख्य अतिथि प्रो. जुजेर वासी ने शिक्षा में सवाल पूछने, संवाद और जिज्ञासा के महत्व को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि अलग-अलग दृष्टिकोण विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव को अधिक गहरा बनाते हैं.
