सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों की डीएवीवी में फीस माफ

इंदौर:सेना के तीनों अंगों में अग्निवीर के रूप में सेवा पूरी करने के बाद देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में किसी भी पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाले युवाओं को शिक्षण शुल्क नहीं देना होगा. विश्वविद्यालय कार्यपरिषद की 649वीं बैठक में यह निर्णय लिया गया. बैठक सोमवार को नालंदा परिसर में हुई.कार्यपरिषद ने विकलांग एवं छात्र दुर्घटना समिति से विद्यार्थियों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता राशि बढ़ाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी. दुर्घटना की स्थिति में बीमा कंपनियों से विद्यार्थियों को क्षतिपूर्ति दिलाने संबंधी पॉलिसी को भी मान्यता दी गई।

इसके लिए कार्यपरिषद सदस्यों ने बैठक का अपना मानदेय समिति को दान किया. परीक्षा के दौरान यूएफएम के तहत मोबाइल से जुड़े मामलों में निर्णय लेने के लिए परीक्षा नियंत्रक की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी. विश्वविद्यालय परिसर को नशामुक्त बनाने के प्रस्ताव पर भी समिति बनाने का निर्णय लिया गया. बैठक में वित्त समिति की अनुशंसा पर आईईटी में स्मार्ट क्लासरूम के लिए इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल खरीदने को मंजूरी दी गई. आईएमएस स्थित ऑडिटोरियम के रिनोवेशन, लोकमाता देवी अहिल्या सभागृह में एयर कंडीशनिंग सुधार, आईआईपीएस भवन के विस्तार और आईईटी परिसर में नवीन बालक छात्रावास के निर्माण को भी स्वीकृति मिली.

स्कूल ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स के भवन निर्माण, फर्नीचर और उपकरणों के लिए पितालिया मानव सेवा ट्रस्ट से करीब 1.5 करोड़ रुपए की सहयोग राशि प्राप्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. आईईटी के पूर्व छात्रों के योगदान से सुसज्जित मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के सभाकक्ष का नाम पूर्व कुलपति प्रो. एस.एम. दास गुप्ता के नाम पर करने का प्रस्ताव भी स्वीकृत हुआ. बैठक में कार्यपरिषद के पांच सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने पर स्मृति चिह्न, शाल और श्रीफल भेंट कर विदाई दी गई.

नशामुक्ति के प्रस्ताव पर कमेटी गठित

कार्यपरिषद् सदस्य डॉ. ए.के. द्विवेदी द्वारा विश्वविद्यालय परिसर को नशामुक्त बनाने के संबंध में रखे गए प्रस्ताव पर कमेटी के गठन का निर्णय लिया गया. डॉ. द्विवेदी ने इस पहल के लिए कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघाई, कुलसचिव प्रज्ज्वल खरे तथा समस्त कार्यपरिषद् सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापित किया.डॉ. द्विवेदी ने कहा कि नशामुक्त परिसर-नशामुक्त युवा-नशामुक्त भारत के उद्देश्य से विश्वविद्यालय को केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि परिसर के आसपास के वातावरण की भी समीक्षा आवश्यक है. उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय की सीमा से लगी दुकानों के संचालन, उन्हें स्थान दिए जाने के नियमों और वहां बिकने वाले सिगरेट, तंबाकू आदि पदार्थों की नियमानुसार समीक्षा की जाए. साथ ही परिसर के आसपास किसी भी प्रकार के प्रतिबंधित अथवा अन्य नशीले पदार्थों की गतिविधि न हो।

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