इंदौर: देश के सबसे स्वच्छ शहर के दावों पर भागीरथपुरा की घटना ने गहरा सवाल खड़ा कर दिया है. गंदे और दूषित पानी से फैली उल्टी दस्त की बीमारी ने अब तक चार लोगों की जान ले ली, जबकि अनेकों लोग बीमार पड़े. एक ओर स्वच्छता रैंकिंग का ताज है, तो दूसरी ओर नलों से आ रहा ऐसा पानी, जो लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है.हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को ताबड़तोड़ सर्वे और जांच अभियान चलाना पड़ा.
प्रभावित इलाके में 2703 घरों का सर्वे किया. इस दौरान 1200 से ज्यादा लोगों की स्वास्थ्य जांच हुई. इनमें से 1174 लोगों का इलाज घर पर ही किया, जबकि 111 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. इलाज के बाद 18 मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं, जबकि बाकी का इलाज जारी है.बीमारी की चपेट में आए लोगों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और तेज कमजोरी जैसे लक्षण सामने आए. कई परिवारों में एक एक से ज्यादा सदस्य बीमार पड़े, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया. हालात तब और गंभीर हो गए जब इलाज के दौरान चार मौतों की पुष्टि हुई.
प्रशासनिक स्तर पर शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि पानी की सप्लाई लाइन में गड़बड़ी, टंकी के दूषित होने या आसपास चल रही खुदाई के कारण साफ पानी में गंदगी मिल गई. पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है. घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि स्वच्छता की रैंकिंग क्या सिर्फ आंकड़ों तक सीमित है, या ज़मीनी हकीकत भी उतनी ही साफ है. देश के सबसे साफ शहर में गंदे पानी से हुई मौतों ने सिस्टम की लापरवाही और निगरानी तंत्र की पोल खोल दी है
