केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण की प्रक्रिया तेज की; IDBI बैंक में रणनीतिक हिस्सेदारी बिक्री FY25 में पूरी होने की उम्मीद, नीतिगत बदलावों पर भी मंथन जारी।
नई दिल्ली, 11 जुलाई, 2025 (नवभारत): केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अपनी हिस्सेदारी कम करने और कुछ बैंकों का निजीकरण करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है। सूत्रों के अनुसार, IDBI बैंक में रणनीतिक विनिवेश (Strategic Divestment) प्रक्रिया वित्तीय वर्ष 2025 (FY25, जो 31 मार्च, 2026 को समाप्त होगा) में अंतिम रूप ले सकती है। यह सरकार की उन महत्वाकांक्षी योजनाओं का हिस्सा है, जिसके तहत वित्तीय क्षेत्र में दक्षता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के बजट में दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और एक सामान्य बीमा कंपनी के निजीकरण की घोषणा की थी। हालांकि, तब से इस प्रक्रिया में विभिन्न कारणों से कुछ देरी हुई है। IDBI बैंक, जिसे अब एक निजी बैंक के रूप में वर्गीकृत किया गया है, में सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की संयुक्त रूप से 60.7% हिस्सेदारी बेचने की योजना है। इस प्रक्रिया में इच्छुक बोलीदाताओं की जांच और अन्य नियामक अनुमोदन शामिल हैं, जो अब निर्णायक चरण में पहुँच गए हैं।
अन्य सार्वजनिक बैंकों पर नीतिगत समीक्षा: दक्षता बढ़ाने और पूंजी जुटाने पर जोर
IDBI बैंक के अलावा, सरकार अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है, हालांकि फिलहाल किसी अन्य बैंक के लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की गई है।
हाल की रिपोर्टों से पता चलता है कि सरकार ने अपने कुछ निजीकरण लक्ष्यों को अस्थायी रूप से रोका है और इसके बजाय कुछ सार्वजनिक बैंकों के विलय या उनकी आंतरिक क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर सकती है। सरकार का मुख्य उद्देश्य बैंकों की दक्षता बढ़ाना, उनकी वित्तीय स्थिति में सुधार करना और आवश्यक पूंजी जुटाना है, ताकि वे देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था का समर्थन कर सकें। बैंकिंग क्षेत्र में इन नीतिगत बदलावों से भारतीय वित्तीय परिदृश्य में महत्वपूर्ण परिवर्तन आने की उम्मीद है।

