
नयी दिल्ली, 07 सितंबर (वार्ता) केन्द्रीय आयुष मंत्रालय के तत्वावधान में 11वां आयुर्वेद दिवस नागपुर में 23 सितंबर को मनाया जा रहा है। इस वर्ष राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस की थीम ‘स्वस्थ्य भविष्य के लिए आयुर्वेद’ है। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने सोमवार को इस दिवस के पूर्वावलोकन कार्यक्रम के मौके पर कहा कि आज पूरी दुनिया में एहतियाती स्वास्थ्य देखभाल, स्वस्थ रहने की विधाओं और समग्र देखभाल की ओर सभी का ध्यान है। इन सभी क्षेत्रों में देश के पास अपनी समृद्व परंपरा और विरासत का भंडार है और इसी वजह से 11वां आयुर्वेद दिवस हमारे लिए अपनी विरासत को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि उस विरासत को भविष्य की स्वास्थ्य आवश्यकताओं से जोड़ने का भी मौका है।
उन्होंने कहा, ” मैं आप सभी के साथ साझा करना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत के विजन के अनुरूप हम एक ऐसा भविष्य चाहते हैं, जहां स्वास्थ्य का अर्थ केवल बीमारी का उपचार नहीं हो बल्कि इसका आशय स्वस्थ रहने की आदत, उचित दिनचर्या, प्रकृति के साथ तालमेल भी है और इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए हम प्रयासरत हैं। ” श्री जाधव ने कहा कि सरकार का ध्यान विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों की उपयोगिता और उनका बेहतर इस्तेमाल रोगी के बेहतर स्वास्थ्य के लिए करने पर है। आयुर्वेद की वैश्चिक स्वीकार्यता और भविष्य के विकास के लिए प्रमाण और नवाचार अंत्यत आवश्यक है। आयुर्वेद का उपयोग समुदाय के बेहतर स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है। इस विधा का संबंध केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य से नहीं है बल्कि स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ समाज और भी है।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को लेकर लोगों के मन भी अच्छी धारणाएं हैं, लेकिन कुछ भ्रांतियां भी हैं और इस वर्ष इस दिवस पर लोगों को उचित जानकारी दिये जाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। हमारा प्रयास है कि 11वां आयुर्वेद दिवस केवल एक सरकारी कार्यक्रम बनकर ही नहीं रह जाये बल्कि यह जनकल्याण का अभियान बने और इसका संदेश घर-घर तक पहुंचे, सभी को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए और इसे एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के तौर पर चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को एक महत्वपूर्ण ज्ञान एवं स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं, जिसकी वैश्विक स्वास्थ्य परिदृश्य में प्रासंगिकता लगातार बढ़ रही है। जितेन्द्र.श्रवण
