सरकारी स्कूल की तस्वीर पर नवाचारी शिक्षक राकेश गुप्ता ने रची सफलता की मिसाल

मंदसौर/नाहरगढ़। ग्रामीण अंचल के शासकीय विद्यालयों में भी समर्पण, नवाचार और जनसहयोग से शिक्षा की तस्वीर बदली जा सकती है। इसका उदाहरण है विकासखंड मल्हारगढ़ की शासकीय प्राथमिक शाला चीताखेड़ी, जहां नवाचारी शिक्षक राकेश गुप्ता के सतत प्रयासों ने विद्यालय को नई पहचान दिलाई है। उनके उल्लेखनीय शैक्षणिक नवाचारों और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए शिक्षक दिवस पर भोपाल में आयोजित समारोह में उन्हें राज्य शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया।

शिक्षक राकेश गुप्ता ने सीमित संसाधनों के बीच स्थानीय सामग्री और जनसहयोग से विद्यालय में गतिविधि आधारित शिक्षण को बढ़ावा दिया। वेस्ट सामग्री से टीएलएम तैयार कर कक्षाओं को प्रिंट-रिच वातावरण में विकसित किया गया, जिससे बच्चों की सीखने में रुचि बढ़ी। पुस्तकालय को बच्चों की पसंद के अनुरूप विकसित करने के साथ ही मिशन अंकुर एवं एफएलएन के तहत भाषा और गणितीय दक्षताओं पर विशेष कार्य किया गया।

गीत, खेल, मंच संचालन और संवादात्मक शिक्षण के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास एवं अभिव्यक्ति क्षमता का विकास किया गया। आज विद्यालय के विद्यार्थी विभिन्न गतिविधियों और प्रतियोगिताओं में आत्मविश्वास के साथ प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।

राकेश गुप्ता को राज्य एवं संभाग स्तर पर मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण देने का अवसर मिला है। उन्होंने एनसीईआरटी नई दिल्ली में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया तथा भोपाल में आयोजित जी-20 कॉन्क्लेव की टीएलएम प्रदर्शनी में सहभागिता कर मंदसौर जिले को प्रथम स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

निजी स्कूल में नहीं पढ़ता गांव का एक भी बच्चा

विद्यालय की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि चीताखेड़ी गांव का एक भी बच्चा निजी विद्यालय में अध्ययन नहीं करता। गांव के सभी अभिभावक अपने बच्चों को शासकीय प्राथमिक शाला में ही पढ़ाना पसंद करते हैं, जो विद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समुदाय के विश्वास को दर्शाता है।

शिक्षक राकेश गुप्ता का कहना है कि यह उपलब्धि बच्चों की मेहनत, अभिभावकों के विश्वास, समाज के सहयोग, वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन और मीडिया के प्रोत्साहन का परिणाम है। शिक्षक दिवस पर भोपाल में राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं अन्य अतिथियों द्वारा उन्हें राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

चीताखेड़ी का यह शासकीय विद्यालय आज केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का प्रेरक मॉडल बनकर उभरा है।

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