नयी दिल्ली, 05 सितंबर (वार्ता) लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की जातिगत जनगणना की मांग को समर्थन देने के लिए कांग्रेस ने शनिवार को देश के विभिन्न शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और मोदी सरकार पर जातिगत जनगणना को लेकर गुमराह करने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस नेताओं ने इन प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और श्री गांधी लंबे समय से जातिगत जनगणना की मांग उठाते रहे हैं। श्री गांधी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ‘जिसकी जितनी आबादी, उसका उतना हक।’ उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना से देश में विभिन्न सामाजिक वर्गों की वास्तविक स्थिति और सरकारी व्यवस्था में उनकी भागीदारी का पता चल सकेगा।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अहमदाबाद में प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि जातिगत जनगणना देश के लिए बहुत जरूरी है। इसके हो जाने से देश में लोगों की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित होगी और सभी लोग मिलकर आगे बढ़ सकेंगे। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना का जो प्रारूप प्रस्तुत किया गया है, उससे साफ है कि मोदी सरकार की नीयत ठीक नहीं है।
हैदराबाद में कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक के. राजू ने हैदराबाद में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि श्री गांधी लगातार जातिगत जनगणना का मुद्दा उठाते रहे हैं और उनके दबाव के कारण मोदी सरकार को इसकी घोषणा करनी पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरीके से अब जातिगत जनगणना कराने की कोशिश की जा रही है, वह अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ धोखा है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रस्तावित प्रारूप में सामान्य वर्ग और अन्य पिछड़ा वर्ग की जातियों के लिए अलग-अलग स्पष्ट कॉलम नहीं हैं और केवल जाति का नाम पूछा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार आंकड़ों के जरिए देश को गुमराह कर रही है और केवल जातिगत जनगणना कराने का दिखावा कर रही है।
पार्टी ने मांग की कि मौजूदा प्रस्ताव को रद्द कर सभी राज्य सरकारों और विशेषज्ञों की राय लेने के बाद नया प्रस्ताव तैयार किया जाये। साथ ही जातियों की पूर्व निर्धारित सूची तैयार करने और जातिगत जनगणना के प्रत्येक चरण के लिए समयसीमा तय करने की मांग की।
