
भोपाल। बड़े तालाब,कलियासोत केरवाडेम में को पूरा भरने में बस एक बारिश का इंतजार है. जो तीन से चार दिन में होने की संभावना है. इन तालाबों के फुल होने के बाद ही इनकी वास्तविक फुल टेंक लेबल की सीमा निर्धारित हो सकेगी. इस मामले को लेकर सांसद आलोक शर्मा ने भी प्रशासन के साथ बैठकर लगातार बैठकें की है. उन्होंने तालाब के केचमेंट से अतिक्रमण हटाने के निर्देश भी दिए हैं. वहीं, प्रशासन भी फुल टेंक लेबल होने का इंतजार कर रहा है. तालाबों के फुल होने के बाद प्रशासन और नगर निगम केचमेंट में अतिक्रमण कर किए गए निर्माणों का चिन्हांकन की सीमांकन की कार्रवाई करेगा. जिससे एनजीटी के आदेश का सही तरीके से पालन कर सके. एनजीटी ने तालाबों के केचमेंट में वर्षों से चले आ रहे अतिक्रमण को हटाने और उनकी सीमा को सुरक्षित कराने प्रशासन को आदेशित किया था. वर्तमान में सभी तालाबों के केचमेंट में शासकीय भूमि के साथ ही निजी भूमि पर अतिक्रमण कर बड़े बड़े भवन, मैरिज गार्डन, कॉलेज, गोडाउन सहित अन्य निर्माण स्थापित हैं.जिस कारण तालाबों का मूल स्वरुप ही बदल गया है.
वहीं इन सभी निर्माणों से तालाबों में गंदगी मिल रही है. इससे जलीय जीव-जंतुओं के जीवन पर संकट आ गया है. जैव विविधता प्रभावित हो रही है. इसको लेकर शहर के वरिष्ठ पर्यावरणविद् डॉ सुभाष सी पांडेय व पर्यावरणविद् राशिद नूर कई बार चिंता जता चुके हैं. वहीं इन तालाबों का पानी शहर की जनता को सप्लाई होता है. इस समस्या से निपटने के लिए प्रशासन और नगर निगम कई बार इनको हटाने के प्रयास कर चुका है. लेकिन यह निर्माण रसूखदारों के हैं जिनमें राजनीतिक, पूर्व आईएएस, आईपीएस एवं पूर्व जजों के निर्माण हैं. जिनके दबाव में आकर प्रशासन कार्रवाई नहीं कर पाता है. वहीं यह लोग उच्च न्यायालय से स्टे लेकर जा जाते हैं. केचमेंट के निर्धारण के लिए एनजीटी के नियमानुसार शहरी क्षेत्र में एफटीएल के बाद 50 मीटर व ग्रामीण क्षेत्रो में 250 मीटर है. उक्त सीमा के बाद ही निर्माण किये जा सकते हैं.
-प्रशासन कर ने एनजीटी के आदेश पर की थी कार्रवाई
तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करने फरवरी माह में तत्कालीन कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कैचमेंट एरिया का सीमांकन करने के लिए 15 सदस्यीय टीम बनाई थी. बैरागढ़, टीटी नगर एसडीएम के नेतृत्व सीमांकन हुआ. 347 अतिक्रमण चिहिन्त भी किए गए. इनमें से टीटी नगर व बैरागढ़ क्षेत्र में आने वाली झील के कैचमेंट एरिया में हुए 58 अतिक्रमणों को हटाया भी गया था. 289 चिहिन्त अतिक्रमण और हटाए जाने थे, लेकिन कुछ लोग कोर्ट चले गए. वहीं पुलिस बल नहीं मिलने से जिला प्रशासन बचे हुए अतिक्रमण नहीं हटा पाया.
-दौबारा सीेमांकन की शिकायतें पहुंची कलेक्टर कार्यालय
्रबताया जाता है कि बारिश से पहले तक नगर निगम और प्रशासन कार्रवाई कर रहा था. लेकिन इसी बीच खानूगांव से अन्य क्षेत्र लोगों ने कलेक्टर कार्यालय में शिकायतें करना शुरू कर दी उनका कहना था कि यह सीमांकन हमारे सामने नहीं हुआ, गलत सीमांकन किया गया है. उसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई को रोक दिया और बारिश का इंतजार करने लगा. बारिश के दौरान तालाबों का एफटीएल होने के बाद ही चिन्हांकन और सीमांकन किया जाए.
एफटीएल होने पर कैचमेंट के निर्माण होंगे साफनेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर जिला प्रशासन को एक बार फिर से बड़ी झील का सर्वे कराएगा. जिसके लिए प्रशासन इस बार ड्रोन का इस्तेमाल करेगा. ड्रोन व सैटेलाइट सहित वैज्ञानिक तकनीक से कराए जाने वाले सर्वे में पुरानी मुनारों, पिलरों की जियो टैगिंग, ग्राउंड ट्रुथिंग, रिमोट सेंसिंग व वीडियोग्राफी की जाएगी. जिससे जो मुनारेें लोगों ने हटाकर गायब कर दी हैं या फिर उनको सीमा से 100 मीटर तक अंदर गाड़ दिया है. उनकी सच्चाई सामने आ जाएगी.
तीन दिन होगी हल्की बारिश
बारिश को लेकर मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार तीन दिन हल्की बारिश होगी. जिसमें कुछ स्थानों पर प्रदेश में होने वाली बारिश का 15 प्रतिशत बारिश कुछ स्थानों पर होने का अनुमान है. जिसमें शुक्रवार को भोपाल में फुहारों के साथ हल्की बारिश होगी.
इनका कहना है
भदभदा के गेट नहीं खोलने दिए हैं, तालाबों के एफटीएल होने के बाद ड्रोन से वीडियोग्राफी कराई जाएगी. जिससे केचमेंट की सीमा निर्धारित हो सके. उसके बाद ही केचमेंट से निर्माण हटाने की कार्रवाई की जाएगी. फिर चाहे रसूखदार हो या अन्य कोई एनजीटी के आदेश का पालन किया जाएगा.
-प्रियंक मिश्रा,कलेक्टर बड़ी झील के कैचमेंट एरिया में जितने भी अतिक्रमण हैं. सभी हो हटाया जाना है. पिछले सीमांकन में 16 मार्च 2022 के बाद हुए अतिक्रमण चिहिन्त किए गए थे. प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया गया है. अब फिर से सर्वे कर केचमेंट के सभी निर्माणों को हटाया जाएगा.
-सुमित कुमार पांडेय,एडीएम
