
जबलपुर। नगर निगम द्वारा शासकीय संपत्ति के संरक्षण और आंतरिक पारदर्शिता को लेकर कड़ा रुख अपनाया गया है। निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने कछपुरा स्थित निगम स्वामित्व के पूर्व चुंगी नाका भवन में अनियमितता और अवैध निर्माण के प्रयास पर त्वरित संज्ञान लेते हुए संबंधित कर संग्रहिता राजेश डेनियल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन्होंने बताया कि निगम स्वामित्व वाली अराजी नं. 714/1/1 पर बने भवन की स्थिति को स्पष्ट करने तथा नियमों के अनुपालन हेतु प्रशासन ने कर्मचारी से तीन दिवस के भीतर तथ्यात्मक जवाब मांगा है। मौके का सत्यापन कराकर सार्वजनिक संपत्ति के किसी भी प्रकार के अवैध उपयोग या नुकसान को रोकने के लिए नगर निगम अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण नियमों के तहत नियमसम्मत प्रक्रिया शुरू की गई है। निगमायुक्त ने संबंधित कर्मचारी को अपना पक्ष और साक्ष्य प्रस्तुत करने का पूरा विधिक अवसर प्रदान किया है।
पट्टा निरस्त करने जिला प्रशासन से की गई अनुशंसा
निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने अधारताल तहसील अंतर्गत मौजा कछपुरा स्थित शाही नाका की मूल्यवान शासकीय भूमि को खुर्द-बुर्द करने और धोखे से 30 वर्षीय पट्टा हासिल करने के मामले में संज्ञान लेते हुए पट्टा निरस्तीकरण की अनुशंसा जिला प्रशासन से की है। कछपुरा स्थित अराजी नं. 714/1/1 पर पूर्व में संचालित चुंगी नाका भवन नगर निगम के स्वामित्व और उपयोग में था। निगम प्रशासन ने भूमि के स्वामित्व संबंधी तथ्यों को छिपाकर गलत तरीके से पट्टा हासिल करने की कोशिश को मौके पर ही पकड़ लिया। निगम आवास में रहते हुए मूल भवन को जे.सी.बी. से गिराने और नियमों के विपरीत पट्टा प्राप्त करने के मामले में निगम ने पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया तथा मौका-निरीक्षण कर वस्तुस्थिति स्पष्ट की। नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 और म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 के तहत शासकीय अधिकारों की रक्षा करते हुए कलेक्टर जबलपुर को गलत तरीके से निष्पादित धारणाधिकार डीड एवं आदेश को तत्काल निरस्त करने तथा राजस्व रिकॉर्ड से प्रविष्टि विलोपित करने हेतु प्रकरण प्रेषित किया गया है। किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण या अनाधिकृत लाभ को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन सहित नगर निगम के संपदा, राजस्व और भवन शाखा को अवगत करा दिया गया है, ताकि संपत्ति संबंधी कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र या भवन निर्माण नक्शा स्वीकृत न हो सके।
