
जबलपुर। हाईकोर्ट ने भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के जहरीले कचरे के विनिष्टीकरण के बाद निकली राख की जांच रिपोर्ट सात दिनों में पेश करने के निर्देश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दिये हैं। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस एके सिंह ने सभी पक्षकारों को जांच रिपोर्ट स्पीड पोस्ट के माध्यम से दस दिनों के अंदर उपलब्ध कराने के निर्देश भी जारी किये, जिससे रिपोर्ट पर वह अपनी राय पेश कर सकें। याचिका पर अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को निर्धारित की गयी है।
गौरतलब है कि यूका के जहरीले कचरे का विनिष्टीकरण किये जाने की मांग करते हुए भोपाल निवासी आलोक प्रताप सिंह द्वारा साल 2004 में दायर किया गया था। याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की मृत्यु हो जाने के कारण हाईकोर्ट उक्त मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में कर रहा है। हाईकोर्ट के आदेश में यूका के जहरीले कचरे का विनिष्टीकरण धार जिले में किया गया था।
पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के समक्ष यह बात रखी गई कि भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड परिसर से जहरीले कचरे को हटाए जाने के बावजूद भी आसपास के कई वार्डों में आम जनता को अब भी दूषित और जहरीला पानी मिल रहा है। इससे स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बना हुआ है। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के जरिए पानी के सैंपल लेकर और उनकी विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश जारी किये थे।
याचिका की सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से पानी की जांच रिपोर्ट पेश की गयी। संबंधित पक्षों ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया। याचिका की सुनवाई के दौरान प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के जहरीले कचरे को जलाने से बची हुई राख में पारा विश्लेषण तथा प्रदूषण पाया गया है। राख का विनिष्टीकरण वर्तमान में मानव बस्तियों के बहुत करीब स्थित ट्रीटमेंट, स्टोरेज और डिस्पोजल फैसिलिटी पीथमपुर, जिला धार में किया जा रहा है। सरकार की तरफ से बताया गया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, सभी पैरामीटर तय सीमा के अंदर हैं।
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिवक्ता के जुबानी तौर पर दिये गये बयान पर हम भरोसा नहीं कर सकते। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सात दिनों में राख के संबंध में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत करें। जिससे हाईकोर्ट रिपोर्ट पर विचार कर सके। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ याचिका पर अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को निर्धारित की है।
