नई दिल्ली, वर्ष 1973 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म ‘बॉबी’ से बतौर मुख्य अभिनेता अपने करियर की धमाकेदार शुरुआत करने वाले ऋषि कपूर रातों-रात स्टार बन गए थे। हालांकि, अपनी इस पहली ही बड़ी सफलता के दौरान कम उम्र और नासमझी के कारण उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया, जिसका उन्हें जीवनभर पछतावा रहा। उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘खुल्लम खुल्ला’ में इस बात का खुलकर जिक्र किया था कि एक व्यक्ति के बहकावे और ट्रॉफी पाने के लालच में उन्होंने कुछ पैसे देकर बेस्ट एक्टर का प्रतिष्ठित अवॉर्ड खरीद लिया था।
अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘जंजीर’ और इंडस्ट्री में छिड़ी बहस
उसी साल रिलीज हुई अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘जंजीर’ ने भी बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था और हर कोई मान रहा था कि उस साल का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार अमिताभ बच्चन को ही मिलना चाहिए। लेकिन जब यह अवॉर्ड ऋषि कपूर को मिला, तो फिल्म इंडस्ट्री में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया और कई तरह के सवाल उठने लगे। ऋषि कपूर को बाद में इस बात का अहसास हुआ कि उनकी इस बचकानी हरकत और नासमझी ने अमिताभ बच्चन जैसे प्रतिभाशाली कलाकार के हक को प्रभावित किया था।
जिंदगीभर रहा उस गलती का पछтаवा, अपनी मेहनत से साबित किया मुकाम
इस घटना के कई साल बीत जाने के बाद भी ऋषि कपूर ने पूरी ईमानदारी से स्वीकार किया कि वह उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी, जिसके लिए उन्हें हमेशा आत्मग्लानी रही। उन्होंने माना कि वे उस समय सफलता के नशे में सही और गलत के फर्क को नहीं समझ पाए थे। हालांकि, बाद के अपने लंबे और शानदार फिल्मी सफर में उन्होंने अपनी बेहतरीन अदाकारी के दम पर यह साबित कर दिया कि वे किसी भी पुरस्कार के मोहताज नहीं हैं, लेकिन वह एक फैसला उनके मन में हमेशा एक कसक बनकर रह गया।

