
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने सेवा से बर्खास्तगी का आदेश अनुचित पाते हुए निरस्त कर दिया है। इसी के साथ नौकरी पर वापस लेने का राहतकारी आदेश पारित कर दिया।
दरअसल याचिकाकर्ता ग्वालियर निवासी आकाश चौहान की ओर से अधिवक्ता नीलेश कोटेचा, एमबी शर्मा व नम्रता कोटेचा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने 2010 में अदालत में सहायक ग्रेड-थ्री की नौकरी हासिल की थी। उसने आवेदन-प्रपत्र में पत्नी के साथ चल रहे प्रकरणों का जिक्र नहीं किया था। नौकरी मिलने के बाद पत्नी के साथ सिविल व क्रिमनल केस का उल्लेख कर दिया। दरअसल, पत्नी दुर्भावनावश सिविल व क्रिमनल केस दायर कर रही थी। वह बार-बार शिकायत कर परेशान कर रही थी। शिकायतों के आधार पर हुई जांच में हर बार याचिकाकर्ता निर्दोष साबित हुआ। जब हाईकोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश से शिकायत की गई, तो विभागीय जांच के बाद सेवा समाप्त करने का आदेश पारित कर दिया गया। रिव्यू और अपील में भी याचिकाकर्ता के विरुद्ध आदेश आया। जिसके बाद वर्ष 2017 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। जिस पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि नो वर्क, नो-पे के सिद्घांत अनुरूप पिछला वेतन नहीं दिया जाएगा किंतु सेवा में वापस लेकर समस्त लाभ प्रदान किए जाएंगे।
