
ग्वालियर चंबल की डायरी
हरीश दुबे
आज सीएम की मौजूदगी में आयोजित बलराम जयंती महोत्सव में किसानों की जबर्दस्त भीड़ जोड़कर महेन्द्र सिंह यादव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अंचल के किसानों पर उनकी पकड़ है और भाजपा मिशन 28 में अंचल के ग्रामीण क्षेत्र में उनके इस प्रभाव का लाभ उठाएगी। शिवराज सरकार के दौर में वे मप्र बीज विकास निगम के चेयरमैन रहे तो मोहन यादव सरकार में उन्हें अपेक्स बैंक के प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वैसे महेंद्र सिंह को ग्वालियर ग्रामीण विधानसभा सीट से टिकट का स्वाभाविक दावेदार माना जाता रहा है। 2008 के चुनाव में भाजपा उन्हें इस सीट से चुनाव लड़ा भी चुकी है, तब उन्होंने कांग्रेस को तीसरे नम्बर पर धकेल दिया था। ग्वालियर ग्रामीण से 2013 और 18 में भाजपा के भारत सिंह कुशवाहा लगातार जीतते रहे लेकिन 23 में पराजित होने के छह महीने बाद ही सांसदी का चुनाव जीते थे। संभावना यही है कि भाजपा भारत सिंह को फिर से सांसदी का चुनाव लड़ाएगी, इस तरह विधानसभा चुनाव में महेंद्र सिंह यादव के लिए ग्वालियर ग्रामीण सीट पर टिकट में कोई बाधा नहीं है।
*क्या वापस फॉर्म में लौट रहे हैं नरोत्तम*
उपचुनाव में पहले टिकट कटने, समर्थकों के बवाल और फिर पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी की पराजय के बाद नरोत्तम मिश्रा की राजनीति को गुजरे जमाने की बात बताने वालों को अपनी धारणा पर पुनर्विचार करना पड़ रहा है। वजह है ओरछा में हुई सत्तारूढ़ दल की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक से जुड़ी एक्टिविटीज में मिश्रा की सक्रियता। प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम को नरोत्तम ने प्रदेश के शीर्ष नेताओं के साथ ही बैठकर सुना। बैठक के बाद सीएम जब जहांगीर महल के जीर्णोद्धार कार्य का मुआयना करने पहुंचे तो नरोत्तम उनके साथ थे। बहरहाल, अब पार्टी नेता कह रहे हैं कि उपचुनाव में टिकट कटने के बाद नरोत्तम के समर्थक यदि सड़कों पर उतरकर हुड़दंग नहीं करते तो आज नितिन नवीन की नवीन टीम में नरोत्तम भी होते। 28 के चुनाव में दतिया से नरोत्तम की संभावनाओं पर भी कयास लगाए जा रहे हैं।
*बिना कार्यकारिणी के गुजरा शहर सदर का पहला साल*
इस सोलह अगस्त को सुरेन्द्र यादव ने कांग्रेस शहर सदर के अपने कार्यकाल का एक बरस पूरा कर लिया। इसी के साथ उनका नाम भी उन कांग्रेस जिलाध्यक्षों की फेहरिस्त में शुमार हो गया जिन्होंने अपने कार्यकाल का ज्यादातर वक्त बिना कार्यकारिणी के बिताया। हालांकि कुछ महीने पहले शहर सदर एवं स्थानीय वरिष्ठ नेताओं की सहमति से तैयार की गई जिला कार्यकारिणी की सूची भोपाल जवाहर भवन से जारी हुई लेकिन इस सूची के ग्वालियर आते ही बगावत हो गई। कार्यकारिणी में बड़े ओहदों से नवाजे गए कई नेताओं ने पार्टी के इस कार्यकारी निकाय से रुखसत होने का ऐलान कर दिया, कई सक्रिय चेहरे कार्यकारिणी से गायब दिखे। इससे पहले कि बगावत और ज्यादा फैलती, इस कार्यकारिणी सूची को जीतू पटवारी ने वापस ले लिया। तब कहा गया था कि नई संशोधित सूची कुछ ही हफ्तों में आएगी लेकिन अब महीने बीत गए हैं।
*…और ‘लॉक’ हो गया हेरिटेज ट्रेन का सपना*
ग्वालियर को हेरिटेज ट्रेन मिलने की उम्मीद अब पूरी तरह खत्म हो गई है। वजह यह कि रेलवे ने ग्वालियर से बानमौर के बीच में बिछे बीस किमी लंबे नैरोगेज ट्रैक को उखाड़ने की पूरी तैयारी कर ली है। ग्वालियर से श्योपुर तक दौड़ने वाली सवा सौ साल पुरानी नैरोगेज ट्रेन कोरोना काल में बंद हो गई थी। कोरोना बीता लेकिन ट्रेन चालू नहीं हुई। ग्वालियर से चंबल के बीच की लाइफलाइन मानी जाने वाली नैरोगेज ट्रेन स्थायी रूप से बंद किए जाने से नाराज लोगों को इसी नैरोगेज ट्रैक पर घोसीपुरा से बानमौर के बीच शाही सुविधाओं वाली दो कोच वाली हेरिटेज ट्रेन चलाए जाने का सिर्फ़ सपना ही नहीं दिखाया गया बल्कि शानदार सुविधाओं वाले दो कोच भी हेरिटेज ट्रेन के लिए सज धज कर ग्वालियर आ गए। हेरिटेज ट्रेन से जुड़ी जिम्मेदारी संभालने वाले रेलवे के बड़े अफसरों ने भी ग्वालियर आकर सर्वे पूरा कर लिया। फिलहाल, यह बात लोगों की समझ से परे है कि अचानक ऐसा क्या हुआ कि रेलवे ने अब न सिर्फ ग्वालियर में यह शाही ट्रेन चलाने से इंकार कर दिया है बल्कि भविष्य की भी संभावनाओं को लॉक करते हुए नैरोगेज ट्रैक को उखाड़ने के लिए टेंडर जारी करने की तैयारी शुरू हो गई है।
