
अनूपपुर, जिला चिकित्सालय अनूपपुर में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उपचार के लिए पहुंची एक महिला के बेहोशी की हालत में होने के बावजूद अस्पताल में बेड उपलब्ध नहीं होने का मामला सामने आया है। परिजनों के अनुसार, मरीज को जमीन पर लेटाने की नौबत आई और आवश्यक सुविधाओं के लिए उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ी।
बताया गया कि महिला की हालत गंभीर होने पर परिजन अस्पताल के स्टाफ एवं जिम्मेदार अधिकारियों से सहायता की गुहार लगाते रहे। इस दौरान कथित तौर पर उन्हें “हम क्या करें” जैसे जवाब मिलने की बात सामने आई है।
मामले को लेकर जब अस्पताल के सिविल सर्जन से व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उनके द्वारा कथित रूप से कहा गया कि “हम क्या करें, मरीज ज्यादा आते हैं।” सिविल सर्जन के इस कथित जवाब ने जिला चिकित्सालय की व्यवस्थाओं और मरीजों के प्रति अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
*मरीज अधिक हैं तो व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी?*
जिला चिकित्सालय में यदि मरीजों की संख्या अधिक है तो उनके लिए पर्याप्त बेड, आपातकालीन व्यवस्था और वैकल्पिक उपचार व्यवस्था सुनिश्चित करना अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी है। विशेषकर बेहोशी या गंभीर अवस्था में पहुंचने वाले मरीज को जमीन पर लेटने की स्थिति क्यों उत्पन्न हुई, यह जांच का विषय है।
*जिम्मेदारों से व्यवस्था सुधारने की मांग*
मरीजों एवं उनके परिजनों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से जिला चिकित्सालय की व्यवस्थाओं की तत्काल समीक्षा करने की मांग की है। साथ ही बेड की उपलब्धता, मरीजों की भर्ती व्यवस्था तथा अस्पताल स्टाफ की कार्यप्रणाली की जांच कर आवश्यक सुधार किए जाने की मांग उठाई गई है।
*अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अस्पताल में मरीज ज्यादा आते हैं, तो उनकी समुचित व्यवस्था कौन करेगा?* क्या मरीजों की अधिक संख्या अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी से बचने का कारण बन सकती है? इन सवालों का जवाब जिला अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग को देना होगा।
