
ग्वालियर। खेती की जरूरत के लिए आसान कर्ज, संकट में सुरक्षा और गांव में ही सहकारिता की मजबूत व्यवस्था। बलराम जयंती पर बुधवार को ग्वालियर के मेला मैदान से प्रदेश के किसानों को सरकार ने इन तीन मोर्चों पर बड़ी सौगात दी। प्रदेश स्तरीय किसान महोत्सव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल और कृषक कवच योजना का शुभारंभ किया। किसानों को राहत देते हुए शून्य प्रतिशत ब्याज योजना को और सरल बनाने की घोषणा भी की गई। साथ ही प्रदेश में नई पंजीकृत 200 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) के कार्यालयों की शुरुआत हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका लाभ किसान तक आसान प्रक्रिया से पहुंचना जरूरी है। सरकार सहकारिता को गांव-गांव तक मजबूत कर किसानों को ऋण और अन्य सुविधाओं से जोड़ने पर काम कर रही है।
*मेहनत करने वाले किसानों का सम्मान*
किसान कल्याण वर्ष के तहत आयोजित महोत्सव में मुख्यमंत्री ने नए पैक्स सदस्यों को अंशपूंजी प्रमाण-पत्र वितरित किए। बेहतर काम करने वाले तीन जिला सहकारी बैंकों और पांच पैक्स संस्थाओं को सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट पैक्स को चेक भी दिए गए। कृषि के अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम करने वाले तीन किसानों को भी राज्य स्तरीय पुरस्कार प्रदान किए गए। इनमें गौ संवर्धन के लिए राजमाता विजयाराजे सिंधिया पुरस्कार, जैविक खेती के लिए कुशाभाऊ ठाकरे पुरस्कार और फलोद्यान के लिए मुख्यमंत्री किसान कल्याण पुरस्कार शामिल रहे।
*सिंधिया, तोमर समेत कई नेताओं ने रखी बात*
महोत्सव में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने भी किसानों को संबोधित किया। कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया, ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाह और अपेक्स बैंक के प्रशासक महेंद्र सिंह यादव सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
*कृषि नवाचारों पर आधारित प्रदर्शनियां बनीं आकर्षण का केंद्र*
मेला मैदान में किसान हितैषी योजनाओं और कृषि नवाचारों पर आधारित प्रदर्शनियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। ग्वालियर-चंबल अंचल सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और कन्हैया लोकगीत ने महोत्सव को उत्सवी रंग दिया।
