इंदौर:पिता की हत्या के मामले में गवाह रहे बेटे को बयान बदलने के लिए डराने धमकाने और इसी दबाव में उसके आत्महत्या करने के आरोपों को अभियोजन पक्ष अदालत में साबित नहीं कर सका. करीब दस साल पुराने मामले में अपर सत्र न्यायालय ने तीन आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया.अभियोजन के अनुसार वर्ष 2016 में सुनील सोनी के पिता जितेंद्र की हत्या का मामला न्यायालय में विचाराधीन था. आरोप था कि इस केस में बयान बदलने के लिए शाकिर उर्फ चाचा, मोहन पहलवान और गुड्डू उर्फ प्रमोद दुबे सुनील को कथित तौर पर धमकाते और परेशान करते थे.
बताया गया कि लगातार दबाव के चलते सुनील ने 20 अक्टूबर 2016 को जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी. घटना के बाद चंदन नगर थाने में तीनों के खिलाफ आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण का केस दर्ज किया था. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 17 गवाहों के बयान कराए. अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद माना कि आरोपियों की ओर से सुनील को आत्महत्या के लिए उकसाए जाने का आरोप संदेह से परे साबित नहीं हुआ. इसके बाद अपर सत्र न्यायाधीश सुनील अहिरवार की अदालत ने शाकिर उर्फ चाचा, मोहन पहलवान और गुड्डू उर्फ प्रमोद दुबे को मामले में दोषमुक्त कर दिया.
