ग्वालियर:शहर की लाइफलाइन कहे जाने वाले तिघरा बांध को लेकर जल संसाधन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। कैचमेंट एरिया में बारिश थमने के बाद अब वैकल्पिक स्रोतों से तिघरा को भरने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसी रणनीति के तहत रविवार को अपर ककेटो बांध के 4 गेट खोलकर 4115 क्यूसेक (116.51 क्यूमेक्स) पानी छोड़ा गया। यह पानी पार्वती नदी के रास्ते पहले ककेटो बांध पहुंचेगा और वहां से चैनल एवं लिफ्टिंग सिस्टम के जरिए तिघरा में डायवर्ट कर स्टोर किया जाएगा।
विभाग के अनुसार दो दिन पहले तक कैचमेंट में हुई बारिश से तिघरा में आवक अच्छी थी, जिससे जलस्तर बढ़कर 728 फीट तक पहुंच गया था। लेकिन पिछले 12 घंटों में कैचमेंट में बारिश शून्य दर्ज की गई है, जिससे प्राकृतिक आवक पूरी तरह थम गई है।
गौरतलब है कि ग्वालियर शहर की विशाल आबादी पूरी तरह तिघरा पर ही निर्भर है। पेयजल आपूर्ति के लिए तिघरा से स्लूस गेट्स के जरिए रोजाना 8.97 एमसीएफटी पानी की निकासी लगातार की जा रही है। यदि नई आवक नहीं होती है तो सप्लाई की निकासी से जलस्तर में तेजी से गिरावट आ सकती है। फिलहाल तिघरा के सभी वेस्ट वियर गेट बंद हैं, ताकि एक बूंद पानी भी व्यर्थ न बहे।
तिघरा डैम पर एक नजर –
वर्तमान जलस्तर 221.89 मीटर (लगभग 728 फीट) है, जबकि फुल टैंक लेवल 225.55 मीटर (740 फीट) है। यानी बांध अभी भी अपनी अधिकतम क्षमता से करीब 12 फीट खाली है। वर्तमान में कुल जल भंडारण 60.77 एमसीएम और लाइव क्षमता 54.20 एमसीएम है, जबकि फुल टैंक पर कुल क्षमता 130.80 एमसीएम हो जाती है।
जल संसाधन विभाग की तकनीकी टीम आवक और निकासी पर 24 घंटे निगरानी कर रही है। विभाग का लक्ष्य है कि मानसून सीजन में ही तिघरा को उसके सुरक्षित स्तर 738 से 740 फीट तक पहुंचा दिया जाए, ताकि शहर को आने वाले महीनों में पेयजल संकट का सामना न करना पड़े।
