नयी दिल्ली, 29 अगस्त (वार्ता) केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मां को जागरूक और सशक्त बनाने से बच्चों में दिव्यांगता या विकास संबंधी समस्याओं की शुरुआती स्तर पर पहचान संभव हो सकती है।
डॉ. सिंह ने यह बात ‘सक्षम’ द्वारा आयोजित प्रबुद्ध ‘मातृ शक्ति सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए कही। सम्मेलन का उद्देश्य महिलाओं को बचाव योग्य दिव्यांगताओं की रोकथाम तथा दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के प्रति जागरूक करना था। उन्होंने कहा कि मां अक्सर बच्चे के स्वास्थ्य और विकास में होने वाले बदलावों को सबसे पहले पहचानती है। इसलिए महिलाओं को सही जानकारी उपलब्ध कराना दिव्यांग सेवा और सशक्तिकरण के व्यापक अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि मातृ स्वास्थ्य, संक्रमण से बचाव, दवाओं का सुरक्षित उपयोग, नियमित जांच और समय पर चिकित्सकीय परामर्श के बारे में जागरूकता परिवारों को महत्वपूर्ण निर्णय लेने में मदद कर सकती है।
उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य जांच, उचित पोषण और अनुशंसित स्क्रीनिंग से कुछ विकारों का समय रहते पता लगाया जा सकता है, जिससे चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक हस्तक्षेप जल्द शुरू किया जा सके।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दिव्यांगता की रोकथाम और शुरुआती हस्तक्षेप की प्रक्रिया बच्चे के जन्म से पहले ही शुरू होनी चाहिए। सरकार बच्चों में दिव्यांगता की जल्द पहचान और सहायता के लिए देशभर में क्रॉस-डिसएबिलिटी अर्ली ट्रीटमेंट सेंटर स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान के बाद उचित उपचार, पुनर्वास और सहायता से बच्चों की विकास संबंधी क्षमताओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने दिव्यांगजनों के लिए खेल और विशेष प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार का भी उल्लेख किया। मध्य प्रदेश में दिव्यांगजनों के लिए देश के पहले हाई-टेक स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों ने भारत के पैरालंपिक प्रदर्शन को मजबूत किया है और पेरिस 2024 पैरालंपिक खेलों में भारत ने रिकॉर्ड 29 पदक जीते।
डॉ.सिंह ने कहा कि दिव्यांगजनों का सशक्तिकरण केवल रोकथाम तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि शिक्षा, पुनर्वास, सहायक उपकरण, कौशल विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले एक दशक में दिव्यांगजनों के लिए सहायता और अवसरों को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाये हैं। सरकारी कर्मचारियों के दिव्यांग बच्चों वाले परिवारों के लिए भी स्थानांतरण में छूट, 22 वर्ष की आयु तक चिल्ड्रेन एजुकेशन अलाउंस, चिकित्सा सुविधाओं के निकट पोस्टिंग और पात्रता के अनुसार दो वर्ष तक पेड चाइल्ड केयर लीव जैसी व्यवस्थाएं हैं।
