
बड़वानी, बारिश की खेंच के बीच कभी तेज उमस और गर्मी तो कभी अचानक बारिश का दौर लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। मौसम के लगातार उतार-चढ़ाव ने शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक मौसमी संक्रमण को तेजी से फैलने का मौका दिया है। सबसे अधिक असर बच्चों पर दिखाई दे रहा है। सर्दी, खांसी और तेज बुखार से परेशान बच्चों को लेकर अभिभावक बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में भी मरीजों का दबाव लगातार बढ़ा है। 1 से 27 अगस्त तक यहां 20 हजार 87 मरीज उपचार के लिए पहुंचे, जिनमें करीब छह हजार बच्चे शामिल हैं। प्रतिदिन 160 से 200 बच्चे ओपीडी में पहुंच रहे हैं। कई बच्चों में 100 से 103 डिग्री तक बुखार, गले में दर्द, सिरदर्द, सुस्ती, चिड़चिड़ापन और भूख कम लगने की शिकायत मिल रही है। डॉक्टरों के अनुसार इस समय फ्लू यानी इन्फ्लुएंजा का असर अधिक है। संक्रमण की तेजी ऐसी है कि घर में एक व्यक्ति बीमार पडऩे के बाद परिवार के दूसरे सदस्य भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
मौसम में बार-बार हो रहा बदलाव संक्रमण फैलने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना रहा है। बारिश के बाद बढ़ी नमी और उमस के साथ तापमान में उतार-चढ़ाव से लोग अलग-अलग वातावरण के संपर्क में आ रहे हैं। भीड़भाड़ वाले स्थानों में संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक तेजी से पहुंच रहा है। डॉक्टर बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
मरीजों की बढ़ती संख्या का असर जिला अस्पताल की पूरी व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। पर्ची काउंटर से लेकर डॉक्टरों के कक्ष और दवा वितरण केंद्र तक लंबी कतारें लग रही हैं। निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में भी मौसमी बीमारी के मरीज बढ़े हैं। बच्चों को तेज बुखार होने पर अभिभावक अधिक चिंतित होकर तत्काल अस्पताल पहुंच रहे हैं।
फ्लू के शुरूआती दिन भारी
जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ जेपी नागोर के अनुसार बच्चों में मुख्य रूप से फ्लू यानी इन्फ्लुएंजा का असर दिखाई दे रहा है। यह संक्रामक वायरल बीमारी हवा और ड्रॉपलेट्स के जरिए तेजी से फैल सकती है। इसका असर सामान्यत: पांच से आठ दिन तक रह सकता है। शुरुआती दो-तीन दिनों में तेज बुखार अधिक परेशान करता है। समय पर चिकित्सकीय परामर्श नहीं मिलने पर कुछ मरीजों को भर्ती करने की स्थिति भी बन सकती है।
