नयी दिल्ली, श्रीलंका के सोनल दिनुषा ने भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 1139 मिनट क्रीज पर बिताकर 420 रन बनाए। उनकी शानदार बल्लेबाजी ने भारत को बेबस कर दिया।
श्रीलंका के बल्लेबाज सोनल दिनुषा ने भारत के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज में ऐसी बल्लेबाजी की, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा। 25 साल के दिनुषा ने सीरीज में 1139 मिनट क्रीज पर बिताए, 722 गेंदें खेलीं, 420 रन बनाए और 3 शतक लगाए। उनकी बल्लेबाजी ने भारतीय गेंदबाजों को लंबे समय तक परेशान किया और श्रीलंका को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकाला।
सिर्फ बड़े स्कोर ही नहीं थे खासियत
दिनुषा की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ उनके बनाए रन नहीं रहे, बल्कि क्रीज पर बिताया गया उनका समय रहा। चार पारियों में जब भी वो बल्लेबाजी करने आए, श्रीलंका मुश्किल स्थिति में था। गॉल टेस्ट की पहली पारी में श्रीलंका का स्कोर 90/4 था, जबकि दूसरी पारी में वो 47/4 पर था। वहीं कोलंबो टेस्ट में दिनुषा 122/4 और 209/4 के स्कोर पर बल्लेबाजी करने उतरे।
आखिरी टेस्ट में सबसे ज्यादा परेशान किया
कोलंबो टेस्ट की दूसरी पारी में श्रीलंका को मैच बचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा समय क्रीज पर बिताना था। शुरुआती विकेट जल्दी गिरने के बाद दिनुषा के साथ निचले क्रम के बल्लेबाज रह गए।
लेकिन उन्होंने अपना प्लान नहीं बदला। उन्होंने रक्षात्मक बल्लेबाजी के साथ-साथ जरूरत के मुताबिक रन भी बनाए। भारत ने उन्हें आउट करने की पूरी कोशिश की, लेकिन दिनुषा लगातार डटे रहे। उन्होंने 86 से ज्यादा ओवर तक भारतीय गेंदबाजों का सामना किया और आखिरकार भारत की मैच जीतने की उम्मीदों को खत्म कर दिया।
स्वीप शॉट बना सबसे बड़ा हथियार
सोनल दिनुषा ने स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ स्वीप और रिवर्स स्वीप का शानदार इस्तेमाल किया। सीरीज में उनके 40 प्रतिशत से ज्यादा रन स्वीप शॉट्स से आए। शुभमन गिल ने भी उनके इस शॉट की तैयारी की थी और मैदान के दोनों तरफ फील्डर लगाए थे।
इसके बावजूद दिनुषा ने अपने फुटवर्क से भारतीय टीम की रणनीति को बेअसर कर दिया। गिल ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि दिनुषा ने शानदार बल्लेबाजी की और उनका डिफेंस बेहद मजबूत था। उन्होंने ये भी माना कि दिनुषा ने भारतीय टीम को एक भी बड़ा मौका नहीं दिया।
तेज गेंदबाजी का प्लान भी नहीं आया काम
गिल ने बताया कि भारत ने दिनुषा को तेज गेंदबाजी से परेशान करने की कोशिश की थी, लेकिन पिच पर पर्याप्त तेजी नहीं थी। प्रसिद्ध कृष्णा लगातार 135-140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी कर रहे थे और बाउंसर भी डाल रहे थे, फिर भी दिनुषा उनका सामना करते रहे।
