राखी बांधने जेल पहुंचीं बहनें, भाई से मिले बिना मायूस लौटीं

सिंगरौली । रक्षाबंधन के अवसर पर अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने की उम्मीद लेकर जेल पहुंचीं कुछ बहनों को निराश होकर लौटना पड़ा। बहनों का आरोप है कि उन्हें अपने बंदी भाइयों से मिलने और राखी बांधने का अवसर नहीं दिया गया। भावुक माहौल में कई बहनें जेल परिसर के बाहर से ही मायूस और रोती हुई वापस लौट गईं। हालांकि इसकी जानकारी मिलते ही कलेक्टर गौरव बैनल ने तत्काल जेल प्रबंधन को निर्देशित किया, इसके बाद बहने अपने भाइयों को राखी बांध पाई।

बहनों ने बताया कि वे दूर से केवल इस उम्मीद में आई थीं कि रक्षाबंधन के पावन पर्व पर कुछ समय अपने भाई के साथ बिताकर उसकी कलाई पर राखी बांध सकेंगी। उनका कहना था कि वे किसी तरह का विरोध या प्रदर्शन करने नहीं आई थीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते की परंपरा निभाने पहुंची थीं। इसके बावजूद मुलाकात नहीं होने से उन्हें निराशा हाथ लगी। मामले के सामने आने के बाद जेल प्रशासन की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों का कहना है कि रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर बंदियों से मिलने के लिए बड़ी संख्या में उनके परिजनों के पहुंचने की संभावना पहले से रहती है। ऐसे में प्रशासन को भीड़, मुलाकात और सुरक्षा को लेकर पहले से समुचित व्यवस्था करनी चाहिए थी। बहनों का कहना है कि यदि किसी कारण से सामान्य मुलाकात संभव नहीं थी तो प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी, ताकि कम से कम बहनें अपने भाइयों को राखी बांध सकें। जैसे ही वीडियों सोशल मीडिया में वायरल हुआ, कलेक्टर सिंगरौली संज्ञान में लेते हुये जेल प्रबंधन को निर्देशित किया, जहां बहने जेल में बंद अपने भाइयों को राखी बांध पाई। हालांकि इसी दौरान जेल प्रबंधन की व्यवस्था पर बहनों ने जमकर भड़ास निकालते हुये गंभीर आरोप लगाई।

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