50 वर्ष पूर्व डांगरा खेड़ा बांध के लिए लाये गए 20 मजदूर परिवार खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं

बागली। 1976 में बागली से 7 किलोमीटर दूर डांगरा खेड़ा और बोरी में सिंचाई के लिए दो बांध परियोजनाएं अमल में लाई गई उस समय निर्माण के लिए इतनी आधुनिक मशीन और तकनीक नहीं थी। यह पूरा कार्य मानव निर्मित ही करना था। तात्कालिक पी एच ई एसडीओ संजीव शर्मा द्वारा शासन को प्रस्ताव भेजा था। कि झाबुआ क्षेत्र से 20से अधिक आदिवासी परिवार मजदूरी के रूप में क्षेत्र में विस्थापित किये जाए उन परिवारों की मूलभूत सुविधा वहीं पर उपलब्ध कराई जाए ताकि बांध बनाने में कोई दिक्कत ना हो उस वक्त आवागमन के साधन भी बहुत कम थे ।बहुत कम लोग जानते हैं इस वक्त उन मजदूर परिवारों के लिए प्राइमरी तक स्कूल एवं आटा चक्की के साथ ही शासकीय राशन दुकान की व्यवस्था की गई थी। भील समाज से जुड़ी उस वक्त की साक्षी रही रंगली बाई जिसे सभी सम्मान से पटलन कहते थे। धीरे-धीरे आदिवासी भील परिवार यहां बढ़ते गए 5 साल बाद यह सिंचाई बांध बनकर तैयार हुए उस वक्त शासन को वन विभाग में और भी कार्य करवाना थे इसलिए आदिवासी परिवारों को थोड़ी-थोड़ी जमीन देकर वहीं पर स्थापित किया आज इनकी संख्या 1000 से अधिक है लेकिन जो अनुबंध उस समय किया था उसे पर सरकार खरी नहीं उतरी बागली विकासखंड अंतर्गत 6 किलोमीटर का मार्ग बेहद खराब और व्यवस्थित हो गया है हालांकि बोरी के बाद से कन्नौद विकासखंड में पक्की सड़क देखी जा सकतीहै। लेकिन विधानसभा बागली ही है। क्षेत्र से जुड़े लोग कहते हैं कि दुनिया भर में विकास हो रहा है इस क्षेत्र में भी मकान और विद्युत व्यवस्था के साथ स्कूल व्यवस्था में बहुत सुधार आया किंतु 6 किलोमीटर का सड़क मार्ग नहीं बन पाने से यह लोग अभी भी अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। पटेल परिवार से जुड़े रामा भाई ने बताया कि बच्चों को स्कूल जाने ले जाने में और विशेष कर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में बारिश के दिनों में बहुत परेशानी आती है।

उन समय हमारे बुजुर्गों ने अपना झाबुआ क्षेत्र छोड़कर इस क्षेत्र के विकास के लिए त्याग किया था लेकिन उनका त्याग व्यर्थ गया हमारी कोई भी सुनवाई नहीं हो पा रही सड़क का निर्माण यदि हो जाता है तो हम आसानी से कांटा फोड़ या बागली जा सकते हैं। एकमात्र बस संचालक लक्ष्मी बस के संचालक शाबान खान ने बताया कि यात्रियों के प्रेम और आग्रह की वजह से वह इस रूट पर बस चल रहे हैं वरना जितनी बचत होती उतना नुकसान भी होता है। यदि सड़क का हाल ऐसा ही बद्तर होता गया तो उन्हें बस चलाने में सोचना पड़ेगा। समाज प्रगति से जुड़े धर्मेंद्र राजावत रहते हैं कि वह समूह के कार्य से इस क्षेत्र में आते हैं तो लोग इस सड़क की परेशानी खुलकर बताते हैं। लोगों को कहना है कि इस क्षेत्र में कैलाश जोशी को जीतकर मुख्यमंत्री बनाया नंदकुमार सिंह चौहान को जिताकर सांसद बनाया दीपक जोशी को जीताकर विधायक बनाया वर्तमान प्रतिनिधि को भी अच्छे वोट से जीत कर विधायक बनवाया है।

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