
जबलपुर। नेताजी सुभाषचन्द्र बोस केन्द्रीय जेल की ऊंची दीवारें शुक्रवार को भाई-बहन के पवित्र प्रेम, आंसुओं और अटूट विश्वास की गवाह बनीं। जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर के निर्देशन में जेल प्रशासन द्वारा आयोजित विशेष मुलाकात के दौरान सलाखों के पीछे बंद कैदियों की कलाई पर जब उनकी बहनों ने राखी बांधी, तो पूरा माहौल भावुक हो उठा। इस पावन अवसर पर जेल परिसर में सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल था। जेल में बंद 1548 पुरुष बंदियों से मिलने के लिए दूर-दराज के जिलों और गांवों से लगभग 3716 माताएं और बहनें पहुंचीं। इन बहनों के साथ 1390 मासूम बच्चे भी अपने मामा और पिता से मिलने जेल पहुंचे थे। वहीं दूसरी ओर, जेल में निरुद्ध 22 महिला बंदियों से मिलने उनके भाई पहुंचे, जिन्होंने अपनी बहनों से राखी बंधवाकर उनके प्रति अपना स्नेह व्यक्त किया। कुल मिलाकर 5106 परिजनों ने जेल की चौखट पर पहुंचकर इस त्योहार को हर्षोल्लास के साथ मनाया। मुलाकात के दौरान जब बहनों ने अपने बंदी भाइयों के माथे पर कुमकुम का तिलक लगाया और कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा, तो कई बंदियों की आंखें छलक आईं। बहनों ने भाइयों के उज्जवल भविष्य और लंबी उम्र की कामना की।
इस भावुक क्षण में बंदियों ने भी अपनी बहनों को सबसे बड़ा उपहार देते हुए संकल्प लिया कि वह जेल की सजा काटने के बाद अपराध और बुराइयों का रास्ता हमेशा के लिए छोड़ देंगे और समाज की मुख्यधारा में लौटकर एक जिम्मेदार नागरिक बनेंगे। हजारों की संख्या में आए परिजनों की सुविधा के लिए जेल प्रशासन ने सुरक्षा के साथ-साथ विशेष इंतजाम किए थे। बीमार और वृद्ध महिलाओं के लिए परिसर में व्हीलचेयर की व्यवस्था की गई थी ताकि उन्हें चलने में परेशानी न हो। जेल कैंटीन के माध्यम से बंदियों के लिए राखी, मिठाई, कुमकुम और ताजे फलों की पर्याप्त व्यवस्था की गई थी। उमड़ती भीड़ को देखते हुए शुद्ध पेयजल और आकस्मिक चिकित्सा के पुख्ता इंतजाम थे। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जेल अधिकारियों और कर्मचारियों को अलग-अलग सेक्टरों की कमान सौंपी गई थी। कार्यक्रम के दौरान जेल चिकित्सक डॉ. लक्ष्मण शाह, जेल उप अधीक्षक मदन कमलेश, जेल उप अधीक्षक रुपाली मिश्रा सहित सभी सहायक जेल अधीक्षक और समस्त अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे रहे।
