नई दिल्ली, एस्सेल ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा लगभग 22,006 करोड़ रुपये के दावों के बदले मात्र 6.5 करोड़ रुपये के पुनर्भुगतान को मंजूरी दी गई है। इस भारी-भरकम ‘हेयरकट’ से नाराज एचडीएफसी बैंक ने इस आदेश को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में चुनौती देने का निर्णय लिया है।
विवादित पुनर्भुगतान योजना और ऋणदाताओं का विरोध
इस योजना के तहत लेनदारों को उनके कुल बकाये का मात्र 0.03 प्रतिशत हिस्सा ही मिल रहा है, जिसका एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस सहित कई अन्य वित्तीय संस्थानों ने कड़ा विरोध किया था। हालांकि, एनसीएलटी की तीन सदस्यीय पीठ के फैसले के बाद इस योजना को मंजूरी मिल गई, जिसे ऋणदाताओं के हितों के विपरीत बताया जा रहा है।
विलय के बाद बैंक की बुक्स में आया लोन
एचडीएफसी बैंक के अनुसार, यह ऋण सुविधा बैंक को एचडीएफसी लिमिटेड के साथ हुए विलय के दौरान मिली थी, जिसके लिए बैंक पहले ही आवश्यक वित्तीय प्रावधान कर चुका है। अब बैंक इस मामले में कानूनी विकल्पों का अध्ययन कर रहा है ताकि अपीलीय मंच पर अपने हितों की रक्षा की जा सके।

