बांदकपुर/दमोह: श्री देव जागेश्वरनाथ जी मंदिर, बांदकपुर के पवित्र व ऐतिहासिक परिसर में स्थित पावन बावड़ी में श्रावणी उपाकर्म का वैदिक व धार्मिक आयोजन श्रद्धा, भक्ति और सनातन वैदिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर जिलेभर से पहुंचे ब्राह्मणों व वैदिक परंपरा के अनुयायियों ने सहभागिता करते हुए विधि-विधान से श्रावणी उपाकर्म संपन्न किया। संपूर्ण कार्यक्रम श्री देव जागेश्वरनाथ जी मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक आचार्य पंडित रामकृपाल पाठक शास्त्री महाराज के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस अवसर पर उपस्थित सभी विप्रजनों व श्रद्धालुओं ने वैदिक संस्कृति, संस्कारों व सनातन परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प लिया
श्रावणी उपाकर्म सनातन वैदिक परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक संस्कार व पर्व है।
यह पर्व विशेष रूप से वेदाध्ययन, आत्मशुद्धि, ऋषि परंपरा के स्मरण तथा नवीन संकल्प के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है श्रावणी उपाकर्म के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में ज्ञान, संयम, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लेता है यह पर्व हमें हमारे महान ऋषियों, मुनियों व वैदिक आचार्यों द्वारा स्थापित उस महान ज्ञान परंपरा का स्मरण कराता है, जिसने भारतीय संस्कृति को युगों-युगों तक दिशा प्रदान की है श्रावणी उपाकर्म के अवसर पर वैदिक मंत्रों के माध्यम से आत्मशुद्धि व धार्मिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया जाता है।
इस अवसर पर जाने-अनजाने में हुई त्रुटियों व दोषों के प्रति प्रायश्चित्त भाव रखते हुए नवीन ऊर्जा व नवीन संकल्प के साथ वैदिक अध्ययन तथा धार्मिक जीवन की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा प्राप्त होती है। श्रावणी उपाकर्म केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, संस्कार और ज्ञान की उस महान परंपरा का प्रतीक है, जिसने हजारों वर्षों से समाज को धर्म, ज्ञान, नैतिकता और सदाचार का मार्ग दिखाया है श्री देव जागेश्वरनाथ जी मंदिर, बांदकपुर परिसर में स्थित पावन बावड़ी में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम का विशेष महत्व रहा भारतीय संस्कृति में जल को अत्यंत पवित्र व जीवनदायी माना गया है वैदिक संस्कारों व धार्मिक अनुष्ठानों में पवित्र जल के माध्यम से शुद्धि, संकल्प और आत्मिक पवित्रता की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।
इसी पवित्र भाव के साथ बावड़ी के समीप वैदिक मंत्रोच्चार व विधि-विधान से श्रावणी उपाकर्म संपन्न कराया गया। कार्यक्रम में संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य पंडित कुंजीलाल डिम्हा द्वारा वैदिक मंत्रों का सस्वर व शुद्ध उच्चारण करते हुए। संपूर्ण धार्मिक कर्म संपन्न कराया गया। उनके मंत्रोच्चार से श्री देव जागेश्वरनाथ जी मंदिर परिसर व पावन बावड़ी का वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक एवं वैदिकमय हो गया उपस्थित विप्रजनों ने पूरे श्रद्धा भाव के साथ धार्मिक कर्मों में सहभागिता की तथा वैदिक परंपराओं के संरक्षण व उनके प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया।
मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक आचार्य पंडित रामकृपाल पाठक शास्त्री जी महाराज के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में सनातन धर्म की प्राचीन वैदिक परंपराओं का विधिवत निर्वहन किया गया। उन्होंने कहा कि श्री देव जागेश्वरनाथ जी मंदिर, बांदकपुर केवल श्रद्धालुओं की आस्था व भक्ति का केंद्र ही नहीं, बल्कि संस्कृत, वेद, वैदिक संस्कृति और भारतीय सनातन परंपराओं के संरक्षण व संवर्धन का भी महत्वपूर्ण केंद्र है मंदिर ट्रस्ट द्वारा समय-समय पर ऐसे धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजन किए जाते हैं, जिनके माध्यम से समाज एवं विशेष रूप से नई पीढ़ी को अपनी महान वैदिक व सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जाता है
मंदिर ट्रस्ट के प्रवक्ता आचार्य पंडित रवि शास्त्री जी महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में वैदिक संस्कारों व सनातन परंपराओं का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। श्रावणी उपाकर्म जैसे पावन पर्व समाज को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और यह संदेश देते हैं कि जीवन में ज्ञान, संस्कार, अनुशासन, सदाचार और धर्म का विशेष महत्व है उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के प्रति सम्मान व श्रद्धा का भाव रखते हुए आने वाली पीढ़ियों तक इन महान संस्कारों को पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए श्रावणी उपाकर्म के इस पावन आयोजन ने श्री देव जागेश्वरनाथ जी मंदिर, बांदकपुर की धार्मिक व सांस्कृतिक परंपरा को और अधिक गौरवान्वित किया वैदिक मंत्रों की पवित्र ध्वनि, विप्रजनों की श्रद्धा, पावन बावड़ी का आध्यात्मिक वातावरण तथा विद्वान आचार्यों के मार्गदर्शन में संपन्न यह आयोजन सभी उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायक व स्मरणीय रहा
