
देवास। अशोक भौमिक की संस्मरण कृति ‘जीवनपुर हाट जंक्शन’ के एक महत्वपूर्ण चरित्र पर आधारित नाटक ‘चौकीदार’ का मंचन मंगलवार को भोपाल चौराहा स्थित परिणय वाटिका में हुआ। रोटरी क्लब ऑफ देवास और अभिरुचि ललित कला अकादमी एवं शोध संस्थान के सहयोग से उज्जैन की यथार्थ सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था द्वारा प्रस्तुत इस नाटक का निर्देशन प्रकाश देशमुख ने किया। चौकीदार की भूमिका दुर्गेश बाली ने निभाई, जबकि प्रकाश देशमुख स्वयं लेखक की भूमिका में मंच पर उपस्थित रहे। नाटक की कहानी एक ऐसे बुजुर्ग चौकीदार के इर्द-गिर्द है, जिसकी सामान्य-सी दिखाई देने वाली जिंदगी के पीछे इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय छिपा है।
उसकी बातचीत और स्मृतियों के माध्यम से धीरे-धीरे पता चलता है कि वह सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज से जुड़ा रहा है और द्वितीय विश्वयुद्ध में घायल भी हुआ था। कभी देश के लिए लड़ने वाला यह व्यक्ति बाद के जीवन में आर्थिक कठिनाइयों के बीच चौकीदारी और बच्चों को संगीत सिखाने जैसे काम करने को मजबूर है। नाटक इस विडंबना को सामने लाते हुए यह सवाल भी उठाता है कि समाज अपने अतीत और उन लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है, जिन्होंने उसके लिए अपना जीवन लगाया। दुर्गेश बाली ने चौकीदार के चरित्र को सहजता और संयम के साथ प्रस्तुत किया। उनके अभिनय में चरित्र की स्मृतियां, अकेलापन और जीवन की कठिनाइयां प्रभावी ढंग से उभरकर आईं। प्रकाश देशमुख ने लेखक की भूमिका में कथा को आगे बढ़ाने के साथ दर्शकों के साथ संवाद का एक स्वाभाविक वातावरण बनाए रखा। दोनों कलाकारों के बीच संवाद और मंच पर उनकी उपस्थिति प्रस्तुति का प्रमुख आकर्षण रही। नाटक की प्रस्तुति सीमित मंच-संसाधनों के बावजूद प्रभावी रही।
प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि, संगीत और मंच सज्जा का इस्तेमाल कथा के अनुरूप किया गया था। प्रत्यक्ष संवाद और अभिनय के सहारे कहानी को आगे बढ़ाने की शैली ने दर्शकों को प्रस्तुति से जोड़े रखा। कथाकार मनीष वैद्य ने अशोक भौमिक का संदेश पढ़कर सुनाया जिसमें उन्होंने कहा था, “प्रकाश भाई ने बड़े जतन से इसे तैयार किया है। नाटक में यदि कोई कमी देखे तो यकीन मानिए, वह कमी मेरे लेखन की वजह से ही है। मुझे पूरा विश्वास है, इस नाटक का चौकीदार आप सभी को निश्चय ही मुग्ध करेगा।” मंचन के बाद कवि बहादुर पटेल एवं ज्योति देशमुख ने कलाकारों को पुस्तकें भेंट कर उनका स्वागत किया। रंगकर्मी सुधीर पंडित एवं दिनेश चौधरी ने भी अपने साथियों के साथ कलाकारों का स्वागत किया। अभिरुचि ललित कला अकादमी में अध्ययनरत कलाकारों ने भी आयोजन की व्यवस्थाओं में सक्रिय भागीदारी करते हुए इसे सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम में प्रतिष्ठित रंगकर्मी गौरी पंडित, कथाकार प्रकाश कान्त, संदीप नाईक, मोहन वर्मा, मनीष शर्मा, प्रभात माचवे, संजीवनी कान्त और दयाराम सारोलिया सहित शहर के साहित्य, कला एवं रंगमंच से जुड़े अनेक लोग उपस्थित थे। शुभारंभ अवसर पर अजय पंडित, चित्रकार जयप्रकाश चौहान, सोनाली चौहान एवं अमित पिठवे उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अमेय कान्त ने किया। आभार जयप्रकाश चौहान ने माना।
