इसके अलावा, श्रीमती सीतारमण ने कई कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों तथा वित्तीय संस्थानों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। उन्होंने ओटैरियो टीचर्स पेंशन प्लान (ओटीपीपी) के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी जो टेलर से मुलाकात की और उसके दीर्घकालिक विश्वास और भारत के राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) के साथ उसकी साझेदारी की सराहना की। बैठक में साझेदारी और सह-निवेश के माध्यम से ओटीपीपी के बुनियादी ढांचा निवेश को बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने गिफ्ट-आईएफएससी को वैश्विक निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में रेखांकित किया और ओटीपीपी को भारत के साथ अपने जुड़ाव को और मजबूत करने तथा भारत में बड़े निवेश के अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने निवेश बैंकिंग एवं वित्तीय सेवा कंपनी कैनअकॉर्ड जेनुइटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डैन डैवियू और उपाध्यक्ष रॉड फिलिप्स से भी मुलाकात की। बैठक में भारत के साथ कैनअकॉर्ड जेनुइटी की भागीदारी को और गहरा करने के अवसरों पर विचार किया गया। इसमें भारतीय कंपनियों को वैश्विक पूंजी जुटाने, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने तथा विदेशों में प्रौद्योगिकी तथा व्यवसायों के अधिग्रहण में सहायता करने पर चर्चा हुई। महत्वपूर्ण खनिजों और खनन, प्रौद्योगिकी एवं स्थिरता, तथा वैश्विक व्यवसायों के लिए भारत को एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। वित्त मंत्री ने भारत के बड़े और तेजी से बढ़ते घरेलू बाजार, लगातार विकसित हो रहे पूंजी बाजार, व्यापक आर्थिक मजबूती तथा निवेशकों की सुरक्षा, कारोबार करने में सुगमता और विवादों के समाधान में सुधार के लिए जारी सुधारों को रेखांकित किया। उन्होंने भारत के विकास के विभिन्न क्षेत्रों में अवसर तलाशने और कनाडाई तथा वैश्विक पूंजी को भारतीय व्यवसायों से जोड़ने में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए कंपनी को प्रोत्साहित किया।
भुगतान एवं निपटान कंपनी पेमेंट्स कनाडा की अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुसान हॉकिन्स से मुलाकात के दौरान विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुके भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र पर चर्चा हुई। इसमें एक सुदृढ़ बैंकिंग प्रणाली के साथ सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना और एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) शामिल हैं। श्रीमती सीतारमण ने कहा कि भारत-कनाडा के मजबूत आर्थिक और जन-से-जन संबंधों, जिनमें महत्वपूर्ण मात्रा में धन प्रेषण (रेमिटेंस) भी शामिल है, को देखते हुए सीमा-पार डिजिटल भुगतान संपर्क विशेष रूप से प्रासंगिक है। उन्होंने कनाडा के प्रमुख सार्वजनिक पेंशन कोष ओएमईआरएस के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ब्लै हचीशन उन्होंने भारत में ओएमईआरएस के निरंतर विश्वास की सराहना की और बुनियादी ढांचे तथा रियल एस्टेट में उसके मौजूदा निवेश के आधार पर दीर्घकालिक जुड़ाव को और मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित किया। बैठक में परिवहन, पारेषण, नवीकरणीय ऊर्जा, शहरी अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसरों पर चर्चा हुई। इसमें भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, बढ़ते मध्यम वर्ग और बुनियादी ढांचे की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखा गया।
वित्त मंत्री ने भारत के निवेशक-अनुकूल नीतिगत वातावरण, कर व्यवस्था में बढ़ती निश्चितता और जारी सुधारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने ओएमईआरएस को देश के विभिन्न क्षेत्रों और भौगोलिक क्षेत्रों में नये अवसरों एवं साझेदारियों की संभावनाएं तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया। बैठक में भारत में ओएमईआरएस की मौजूदगी को और मजबूत करने तथा मौजूदा बुनियादी ढांचा एवं रियल एस्टेट निवेश से आगे बढ़कर अन्य क्षेत्रों में भी उसकी भागीदारी का विस्तार करने के अवसरों पर चर्चा हुई। श्रीमती सीतारमण ने कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड (सीपीपीआईबी) के अध्यक्ष एवं सीईओ जॉन ग्राहम से मुलाकात की।
उन्होंने भारत में सीपीपीआईबी के निरंतर विश्वास और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता की तारीफ की। बैठक में पारेषण, नवीकरणीय ऊर्जा, सड़कें, बंदरगाह, शहरी अवसंरचना, डिजिटल बुनियादी ढांचा और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में संस्थागत पूंजी के लिए निवेश के अवसरों का विस्तार करने पर चर्चा हुई। उन्होंने भारत में बढ़ती अवसंरचना मौद्रीकरण पाइपलाइन और निवेशकों की सुरक्षा, नियामकीय स्तर पर नीतियों में स्थिरता एवं पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए किये जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। साथ ही, गिफ्ट-आईएफएससी के माध्यम से निजी ऋण और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में उपलब्ध नये अवसरों का भी उल्लेख किया।
वित्त मंत्री ने सन लाइफ फाइनेंशियल के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी केविन डी. स्ट्रेन से मुलाकात के दौरान भारत की मजबूत एवं लचीली आर्थिक वृद्धि, विस्तारित बाजार, व्यापक आर्थिक स्थिरता तथा तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल एवं भौतिक बुनियादी ढांचे पर बात की। उन्होंने बीमा क्षेत्र के उदारीकरण पर प्रकाश डाला, जिसमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा को 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत किया जाना और ‘2047 तक सभी के लिए बीमा’ की सरकार की सोच शामिल है। बैठक में बीमा, परिसंपत्ति प्रबंधन, वैकल्पिक निवेश और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में सन लाइफ की भारत में मौजूदगी को और मजबूत करने के अवसरों पर भी चर्चा हुई। श्रीमती सीतारमण ने सन लाइफ ग्लोबल सॉल्यूशन्स के भारत में 20 साल पूरे होने पर बधाई दी और भारत-कनाडा के बीच निवेश एवं कारोबारी संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित किया।