पहले शक्कर, अब प्याज ने निकाले आंसू; 60 रुपये किलो तक पहुंचे भाव

इंदौर: प्याज और रोटी का रिश्ता भी महंगाई की चपेट में प्याज को गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की रसोई का अहम हिस्सा माना जाता है. लेकिन जिस प्याज और रोटी को कभी सस्ता और साधारण भोजन माना जाता था, वही प्याज अब कई परिवारों की थाली से दूर होता नजर आ रहा है. लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है. लोगों का कहना है कि यदि रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर जल्द नियंत्रण नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में घरेलू बजट संभालना और मुश्किल हो सकता है.

प्याज के बढ़ते दाम एक बार फिर आम आदमी की रसोई पर भारी पड़ने लगे हैं. कुछ दिन पहले तक फुटकर बाजार में करीब 15-20 रुपये किलो बिकने वाला प्याज अब 50-60 रुपये किलो तक पहुंच गया है. प्याज के बढ़े भाव ने गृहणियों के साथ होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का बजट भी बिगाड़ दिया है. बाजार में खरीदारी करने पहुंचे लोगों का कहना है कि रोजमर्रा की रसोई में प्याज की खपत अधिक होने के कारण इसके दाम बढ़ने का सीधा असर घर के मासिक खर्च पर पड़ रहा है.

रसोई का वजट बिगड़ा
गृहणी रितु मिश्रा ने कहा कि महंगाई ने रसोई का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है. कुछ दिन पहले तक 40 रुपये किलो मिलने वाली शक्कर अब करीब 65 रुपये किलो तक पहुंच गई है और अब प्याज के बढ़े दाम ने परेशानी और बढ़ा दी है. उन्होंने कहा कि रोजमर्रा की जरूरत की हर वस्तु महंगी होती जा रही है. यदि महंगाई पर जल्द लगाम नहीं लगी तो मध्यमवर्गीय परिवारों के सामने घर चलाना मुश्किल हो जाएगा.

भाव सुनकर ही होश उड़ गए
गृहणी वीणा ने कहा कि महंगाई ने महिलाओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. सब्जी से लेकर रसोई की दूसरी जरूरतों तक के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. उन्होंने बताया कि मंडी में प्याज खरीदने पहुंचीं तो भाव सुनकर ही होश उड़ गए. उनका कहना था कि पहले शक्कर ने रुलाया और अब प्याज भी आंखों में आंसू ला रहा है.

त्योहार के बीच जेब पर बढ़ा बोझ
खरीदारी करने पहुंचे पीएन दीक्षित ने कहा कि प्याज महंगा होने के कारण वह जरूरत से कम प्याज खरीदकर ले जा रहे हैं. त्योहार का समय है और घर के लिए अन्य सामान भी खरीदना है. ऐसे में 60 रुपये किलो तक पहुंचा प्याज जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है.

ग्राहक भाव पूछकर लौट रहे
आलू-प्याज विक्रेता राजकुमार मोटवानी ने बताया कि पिछले चार दिनों से ग्राहकों की संख्या और खरीदारी दोनों में कमी आई है. करीब 90 प्रतिशत ग्राहक प्याज का भाव पूछकर ही लौट जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि जिस प्याज का भाव 15 से 20 रुपये किलो के आसपास रहना चाहिए, वह अब 35 से 45 रुपये किलो में मिल रहा है. ऊपर से किराया और अन्य खर्च जोड़ने के बाद फुटकर भाव 60 रुपये किलो या उससे अधिक हो जाता है. मोटवानी ने कहा कि वह करीब 65 वर्षों से व्यापार कर रहे हैं, लेकिन प्याज के दामों ने इतनी परेशानी कम ही देखने को मिली है. उनका कहना है कि महंगा प्याज खरीदने के बजाय ग्राहक अब केवल भाव पूछकर आगे बढ़ जा रहे हैं.

आवक कमजोर, फसल खराब होने से बढ़े भाव
थोक व्यापारी जीतू जाटव ने बताया कि मंडियों में प्याज की आवक कम हो गई है. कई क्षेत्रों में फसल खराब होने के कारण आगे से ही प्याज महंगे भाव में मिल रहा है. आवक में कमी का सीधा असर बाजार भाव पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि फिलहाल प्याज के भाव में तेजी बनी रहने की संभावना है. थोक व्यापारी त्रिलोक ने बताया कि कुछ समय पहले थोक बाजार में 10 से 12 रुपये किलो बिकने वाला प्याज अब 35 से 45 रुपये किलो तक पहुंच गया है। इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में फसल प्रभावित होने से मंडी में आवक कमजोर है। बाहर से भी प्याज आता है, लेकिन फिलहाल उसकी आवक पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि जैसे ही मंडी में प्याज की आवक बढ़ेगी और सप्लाई सामान्य होगी, कीमतों में भी कमी आने की उम्मीद है।

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