सारनी।लगातार हो रही बारिश ने जहां किसानों के चेहरों पर उम्मीद की चमक लौटाई है,वहीं सूर्य देवता के लगातार नदारद रहने से खेतों में खड़ी फसलों पर संकट भी गहराने लगा है। पर्याप्त बारिश कुछ फसलों के लिए किसी आसमानी आशीर्वाद से कम नहीं है, लेकिन लंबे समय तक धूप नहीं निकलने से खेतों में जलभराव,फसल गलने और रोग लगने की आशंका बढ़ गई है।किसानों की निगाहें अब बारिश के साथ-साथ धूप निकलने पर भी टिकी हुई हैं।इधर अगस्त के अंतिम सप्ताह में लगातार हो रही बारिश के कारण सतपुड़ा जलाशय का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए मंगलवार 25 अगस्त को सुबह 11:45 बजे सतपुड़ा बांध के 7 गेट 3 फीट तक खोल दिए गए। गेट खुलने के बाद जलाशय से लगभग 18,544.75 क्यूसेक पानी प्रति सेकंड की रफ्तार से छोड़ा जा रहा है। लगातार बारिश और बांध के गेट खुलने के कारण सतपुड़ा नदी तथा आसपास के जलस्रोतों में जलस्तर बढ़ने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति निर्मित होने से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन और स्थानीय लोगों को नदी- नालों तथा जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।25 अगस्त की सुबह 8 बजे तक सारनी एवं आसपास के क्षेत्र में 610 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जा चुकी है। हालांकि बारिश का आंकड़ा क्षेत्र के निर्धारित लक्ष्य से अभी भी पीछे है, लेकिन लगातार जारी वर्षा ने जलाशय और खेतों दोनों की तस्वीर बदल दी है।
किसानों के लिए यह बारिश फिलहाल वरदान और संकट का दोहरा रूप लेकर आई है।एक ओर पानी की कमी दूर हो रही है तो दूसरी ओर धूप की कमी फसलों के लिए नई चुनौती बनती जा रही है।
