अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप को डाक मतपत्रों पर प्रतिबंध संबंधी कदम आगे बढ़ाने की अनुमति दी

न्यूयॉर्क, 25 अगस्त (वार्ता) अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के डाक से मतदान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कार्यकारी आदेश के कुछ हिस्सों को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है।
अदालत ने आदेश की वैधता पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है और आगे की कानूनी चुनौती के कारण नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले इसके लागू होने पर अनिश्चितता बनी हुई है।

सुप्रीम कोर्ट के 10 पृष्ठ के बिना हस्ताक्षर वाले आदेश में ट्रंप प्रशासन को उस प्रस्ताव पर आगे बढ़ने की अनुमति दी गयी है, जिसके तहत होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (डीएचएस) उन डेमोक्रेट-शासित राज्यों में मतदाताओं की राज्यवार सूची तैयार कर सकेगा, जिन्होंने इस योजना को अदालत में चुनौती दी है। आदेश पर अदालत के तीन उदारवादी न्यायाधीशों ने असहमति जतायी।

श्री ट्रंप के मार्च में जारी कार्यकारी आदेश में अमेरिकी डाक सेवा और डीएचएस को चुनाव प्रक्रिया में पहले से कहीं अधिक भूमिका देने का प्रस्ताव रखा गया था। डाक सेवा से जुड़ी एक अन्य व्यवस्था के तहत डाक मतपत्र भेजने वाले राज्यों को पात्र मतदाताओं की सूची उपलब्ध कराने और मतपत्र के लिफाफों पर ऐसी जानकारी दर्ज करने की आवश्यकता हो सकती है, जिससे उनकी निगरानी की जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने डाक सेवा को इस प्रावधान पर आगे बढ़ने की अनुमति दी है, लेकिन निचली अदालत ने देशभर में इसके क्रियान्वयन पर अलग से रोक लगा रखी है। ऐसे में डाक सेवा के कदम को लागू करने से पहले आगे कानूनी कार्यवाही की संभावना है और मामला दोबारा सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच सकता है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका फैसला ट्रंप के कार्यकारी आदेश की वैधता पर नहीं है, बल्कि राज्यों की कानूनी चुनौती के समय से संबंधित है। अदालत ने कहा कि सरकार की ओर से आदेश को लागू करने के लिए उठाया गया कोई भी कदम जरूरी नहीं कि कानूनी हो।

श्री ट्रंप लंबे समय से व्यापक चुनावी धोखाधड़ी के निराधार दावे करते रहे हैं और डाक मतदान को लेकर संदेह पैदा करते रहे हैं। डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाले राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि नई व्यवस्था से उन्हें चुनाव की तैयारियों के बीच अतिरिक्त समय और संसाधन खर्च करने पड़ेंगे।

व्हाइट हाउस ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे अमेरिकी चुनावों की सुरक्षा के लिए ”बड़ी जीत” बताया।
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता लॉरेन बिस ने कहा कि ये उपाय डाक मतपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और केवल अमेरिकी नागरिकों के जरिए अमेरिकी नेताओं के चुनाव को सुनिश्चित करने के लिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के तीन उदारवादी न्यायाधीशों ने फैसले का विरोध किया। न्यायमूर्ति सोनिया सोतोमयोर ने न्यायमूर्ति एलेना कागन के साथ असहमति जताते हुए कहा कि निचली अदालतों के पास डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाले राज्यों के पक्ष में फैसला देने का अधिकार था। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सुप्रीम कोर्ट के बहुमत ने ट्रंप के निर्देशों की वैधता पर फैसला नहीं दिया है।

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