येरेवन, 25 अगस्त (वार्ता) आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान ने संसद में ऐतिहासिक ऐलान करते हुए कहा है कि उनका देश यूरोपीय संघ (ईयू) की सदस्यता के लिए आवेदन करने की तैयारी शुरू करेगा। इसे रूस के प्रभाव वाले देश के लिए एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
श्री पशिन्यान ने सोमवार को संसद और देश को संबोधित करते हुए कहा कि आर्मेनिया निकट भविष्य में ईयू सदस्यता के लिए औपचारिक आवेदन करेगा। उन्होंने कहा कि सदस्यता के मुद्दे पर अंतिम फैसला जनमत संग्रह के जरिए किया जाएगा, लेकिन यह प्रक्रिया ईयू में शामिल होने के औपचारिक आवेदन के बाद ही शुरू होगी।
उन्होंने बताया कि पहले यूरोपीय संघ से आवेदन पर जवाब मिलने का इंतजार किया जाएगा। इसके बाद ईयू सदस्यता के लिए बातचीत की रूपरेखा पर चर्चा होगी और उसके बाद ही सदस्यता के सवाल को जनमत संग्रह के लिए जनता के सामने रखा जाएगा।
आर्मेनिया फिलहाल रूस के नेतृत्व वाले सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (सीएसटीओ) का सदस्य है। श्री पशिन्यान ने कहा कि आर्मेनिया फिलहाल संगठन में बना रहेगा, लेकिन जब रूस के नेतृत्व वाले गठबंधन और ईयू के बीच चुनाव करना अनिवार्य हो जाएगा, तब देश अपना फैसला करेगा।
उन्होंने कहा, ” अगर संगठन आर्मेनिया को सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन से बाहर करने का फैसला करता है तो मुझे बहुत खुशी होगी। कम से कम इससे हमें यह तय करने की दुविधा से मुक्ति मिल जाएगी कि संगठन छोड़ना है या नहीं। ”
श्री पशिन्यान ने रूस के साथ संबंधों पर भी सवाल उठाये। उन्होंने कहा कि करीब दो शताब्दियों तक आर्मेनिया-रूस संबंध इस समझ पर आधारित रहे कि रूस आर्मेनियाई जनता और देश की सुरक्षा का गारंटर है।
उन्होंने कहा कि 2021, 2022 और 2023 के घटनाक्रमों ने दिखाया कि रूस खुद अपनी सुरक्षा चुनौतियों के कारण इस भूमिका को निभाने में गंभीर सीमाओं का सामना कर सकता है। उन्होंने यह टिप्पणी अजरबैजान के साथ कराबाख को लेकर आर्मेनिया के संघर्षों के संदर्भ में की।
श्री पशिन्यान ने कहा कि इन घटनाक्रमों से आर्मेनिया को अपने इतिहास से मिले सबक पर फिर विचार करने की जरूरत महसूस हुई। उन्होंने संकेत दिया कि अजरबैजान के साथ हालिया शांति प्रक्रिया ने भी क्षेत्र में नई परिस्थितियां पैदा की हैं।
अगस्त 2025 में शांति प्रक्रिया पर हस्ताक्षर के बाद आर्मेनिया और अजरबैजान आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस प्रक्रिया में यूरोपीय संघ और अमेरिका की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
