नयी दिल्ली, 25 अगस्त (वार्ता) पश्चिम एशिया में पिछले कुछ समय से बनी स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने में आ रही बाधाओं के बीच राष्ट्रीय शिपिंग बोर्ड (एनएसबी) ने विदेशी जहाजों पर निर्भरता कम करने के लिए 100 नये जहाजों को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना बनायी है।
केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मंगलवार को बोर्ड के पहले ‘सागर संवाद’ कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने इस मौके पर एनएसबी की वेबसाइट भी लॉन्च की। कार्यक्रम में श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया और बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर भी शामिल हुए।
राष्ट्रीय शिपिंग बोर्ड ने अपने वाणिज्यिक जहाज बेड़े में 100 नये जहाज जोड़ने सहित पांच सूत्रीय रोडमैप पर जोर दिया। “वर्ष 2030 के लिए समुद्री भारत विजन और 2047 के लिए समुद्री अमृत काल विजन की दिशा में रोडमैप तैयार करना” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारी, जहाज मालिक, वित्तीय क्षेत्र के प्रतिनिधि और देश के समुद्री प्रशिक्षण संस्थानों के युवा कैडेट शामिल हुए।
श्री सोनोवाल ने समुद्री प्रशिक्षण संस्थानों के प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ विशेष संवाद किया और उनके सवालों के जवाब दिये। उन्होंने 10,000 करोड़ रुपये की कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम की सफलता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वैश्विक शिपिंग कंपनी मर्सक अब भारत में निर्मित कंटेनरों के ऑर्डर दे रही है।
उन्होंने कहा, “मैं राष्ट्रीय शिपिंग बोर्ड के पांच सूत्रीय रोडमैप – वित्तीय सुधार, सुनिश्चित कार्गो सहायता, प्रतिस्पर्धी वित्त की उपलब्धता, नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाना और कारोबार में वास्तविक सुगमता – का स्वागत करता हूं।”
उन्होंने कहा कि ये पांच अलग-अलग मांगें नहीं हैं, बल्कि यह उस राष्ट्र की आर्थिक संरचना है जो अब अपने व्यापार को स्वयं नियंत्रित करना चाहता है।
दिन के दूसरे सत्र में “समुद्री श्रम शक्ति-अवसर और चुनौतियां” विषय पर चर्चा हुई। इसकी अध्यक्षता श्री मांडविया ने की। उन्होंने कहा कि देश का समुद्री क्षेत्र देश के युवाओं के लिए रोजगार का एक बड़ा इंजन बन सकता है। भारत को दुनिया में कुशल नाविकों की आपूर्ति करने वाला अग्रणी देश बनाया जा सकता है।
श्री ठाकुर ने “भारतीय टन भार में वृद्धि-अवसर और चुनौतियां” विषय पर पैनल चर्चा की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि भारत हर साल विदेशी शिपिंग कंपनियों को माल ढुलाई के रूप में करीब 75 अरब डॉलर देता है। इन जहाजों के जरिये हमारे कच्चे तेल, गैस, कोयला और यूरिया जैसे महत्वपूर्ण सामानों की ढुलाई होती है। यह भारतीय जहाज मालिकों की क्षमता की समस्या नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धात्मकता और मांग से जुड़ी समस्या है। विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत अपने व्यापारिक समुद्री मार्गों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रह सकता। भारत को अपने समुद्री परिवहन पर स्वयं नियंत्रण स्थापित करना होगा।
