
धार। हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष पूरे होने के अवसर पर रविवार रात त्रिमूर्ति नगर स्थित जेएमडी पैलेस में ‘हल्दीघाटी का सत्य-450 वर्ष’ विषय पर विचार संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता हुकुमचंद जी सांवला ने हल्दीघाटी युद्ध के इतिहास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर इस युद्ध में महाराणा प्रताप की विजय हुई थी। उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी की माटी भारतीय स्वाभिमान, राष्ट्रभक्ति और मातृभूमि की रक्षा के अदम्य संकल्प की गवाही देती है।
सांवला ने कहा कि अब तक जिस इतिहास को समाज के सामने रखा गया, उसमें अकबर का महिमामंडन किया गया, जबकि तत्कालीन अभिलेखों, ताम्रपत्रों, पट्टों और भौगोलिक परिस्थितियों के विश्लेषण से हल्दीघाटी युद्ध का दूसरा पक्ष सामने आता है। उन्होंने कहा कि इन ऐतिहासिक साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि महाराणा प्रताप ने अकबर की विशाल सेना का सामना करते हुए उसके छक्के छुड़ा दिए थे और विजय श्री महाराणा प्रताप को ही प्राप्त हुई थी।
उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध केवल दो सेनाओं के बीच हुआ एक ऐतिहासिक संघर्ष नहीं था, बल्कि यह भारतीय स्वाभिमान, राष्ट्रभक्ति और अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष का अमर प्रतीक है। महाराणा प्रताप का जीवन और उनका संघर्ष आज भी समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। सांवला ने कहा कि इतिहास के वास्तविक तथ्यों को सामने लाने और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राजेंद्र सिंह जी चौहान ने की। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन संपूर्ण समाज के लिए प्रेरणापुंज है। इतिहास के पुनर्लेखन और वास्तविक तथ्यों को सामने लाने के ऐसे प्रयास निरंतर होते रहने चाहिए, ताकि युवा पीढ़ी अपने वास्तविक नायकों और उनकी शौर्यगाथा पर गर्व कर सके।
१-२
—————–
विशेष अतिथि हरिराम जी कपासिया ने हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष के संदर्भ में राष्ट्रीय चेतना और राष्ट्रभक्ति को मजबूत करने पर बल दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं मां भारती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण से हुआ। अतिथियों का साफा, शॉल, स्मृति चिह्न एवं पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया। चिरंजीव सेंगर ने राष्ट्रभक्ति गीत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता अश्विनी के. जोशी ने किया। अंत में तृप्ति जायसवाल ने आभार व्यक्त किया। सिद्धि जी द्वारा प्रस्तुत सामूहिक राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
