
इंदौर. क्राइम ब्रांच में एक शिकायत पर कार्रवाई नहीं करने और युवक को छोड़ने के एवज में 1.20 लाख रुपए रिश्वत मांगने के आरोप में लोकायुक्त ने तत्कालीन निरीक्षक, एक ड्राइवर, एक तत्कालीन आरक्षक और एक निजी व्यक्ति के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है. फरियादी से 50,800 रुपए यूपीआई के जरिए निजी व्यक्ति को दिलवाए, जबकि 70 हजार रुपए नकद लेने का आरोप है. लोकायुक्त ने शिकायत के साथ मिले तकनीकी साक्ष्यों के सत्यापन के बाद सोमवार को केस दर्ज किया.
तुलसी नगर में रहने वाली प्रीति हजारी ने 2 अप्रैल को लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत की थी कि उनके बेटे प्रांजल हजारी को एक शिकायत के सिलसिले में क्राइम ब्रांच कार्यालय बुलाया था. आरोप है कि शिकायत पर कार्रवाई नहीं करने और प्रांजल को छोड़ने के लिए तत्कालीन क्राइम ब्रांच निरीक्षक सुजीत श्रीवास्तव और अन्य लोगों ने 1.20 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी. शिकायत में बताया कि 20 मार्च को 50,800 रुपए यूपीआई के माध्यम से निजी व्यक्ति दीपक पटेल को ट्रांसफर करवाए गए और इसके बाद प्रांजल को छोड़ दिया था. आरोप है कि बाकी 70 हजार रुपए अगले दिन नकद लिए. शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त को लेन देन से जुड़े तकनीकी साक्ष्य भी उपलब्ध कराए थे. शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक ने इसका सत्यापन कराया. तकनीकी साक्ष्यों की जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद सोमवार को तत्कालीन निरीक्षक सुजीत श्रीवास्तव, क्राइम ब्रांच के ड्राइवर अभय सिंह, तत्कालीन आरक्षक विकास सेंधव और निजी व्यक्ति दीपक पटेल के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.
मामले में जांच जारी….
मामले में लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय ने नव भारत को बताया कि शिकायत के साथ उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों का सत्यापन कराया था, जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद चार लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है. मामले में लेन देन और आरोपियों की भूमिका से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है.
