
घर में उन्हें बेहद खूबसूरत नक्काशी वाली लकड़ी की एक अलमारी मिली, जो करीब 80 से 90 वर्ष पुरानी बताई जा रही है और अब भी काफी हद तक सुरक्षित है। इस अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा लगा जैसे उनके अतीत का एक छोटा-सा हिस्सा अब भी उनका इंतजार कर रहा था। यात्रा के दौरान संदीपा को एक पुराने कपबोर्ड में 30 से 40 वर्ष पुराने एयर इंडिया के बोर्डिंग पास और बैगेज टैग भी मिले। उन्होंने इन्हें ऐसे छोटे-छोटे कागज के टुकड़े बताया, जो उस समय शायद महत्वहीन थे, लेकिन मुश्किलों के बावजूद किसी तरह सुरक्षित रह गए। उन्हें अपने चाचा के सिलवाए हुए कुछ पुराने सूट भी मिले, जिनमें कुछ यूनाइटेड किंगडम में तैयार किए गए थे। परिवार की इन यादों के साथ कश्मीर की प्राकृतिक खूबसूरती ने भी संदीपा को खासा प्रभावित किया। शालीमार बाग के खिले फूल, रंग-बिरंगे गेंदे, नगीन झील की शांति और परी महल से दिखाई देने वाले मनोरम नजारे उनकी यात्रा के प्रमुख आकर्षण रहे।
नगीन झील को अपने पसंदीदा स्थानों में शामिल करते हुए उन्होंने कहा कि हर कोई डल झील की बात करता है, लेकिन नगीन झील हमेशा उनके दिल के सबसे करीब रहेगी। संदीपा ने शंकराचार्य मंदिर में भी दर्शन किए। उनकी यह यात्रा उनके लिए आध्यात्मिक शांति और आत्ममंथन का अवसर भी बनी। अपनी तस्वीरों और अनुभवों के जरिए उन्होंने संदेश दिया कि कुछ जगहें हमेशा घर जैसी लगती हैं और कुछ यादें कभी हमारा साथ नहीं छोड़तीं। संदीपा धर जल्द ही नेटफ्लिक्स की आगामी सीरीज ‘चुंबक’ में नजर आएंगी। इस सीरीज में उनके साथ नीना गुप्ता और सुमीत राघवन भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे।
