
जबलपुर। मप्र उच्च न्यायालय में अभी भी लंबित मामलों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है। बता दे कि इस साल रिकॉर्ड 15 नए जज मिलने के बाद भी अक्टूबर माह के अंत में उच्च न्यायालय में लगभग 4 लाख 82 हजार मुकदमे लंबित थे। उम्मीद की जा रही है कि मौजूदा चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा द्वारा किए जा रहे प्रयासों से इन आंकडों में कमी आएगी। उच्च न्यायालय के इतिहास में यह पहला मौका था, जब एक साल में 15 नए जज मिले। मालूम हो कि उच्च न्यायालय में जजों के स्वीकृत पदों की संख्या 53 है, लेकिन अभी उच्च न्यायालय में कुल 43 जज पदस्थ हैं। अक्टूबर माह के अंत तक उच्च न्यायालय में पेंडेंसी 4 लाख 82 हजार के आसपास है। ऐसे में एक जज पर 11 हजार केसों का औसतन भार है।
जमानत अर्जियां भी लंबित
मप्र उच्च न्यायालय में इस समय जमानत अर्जियों की पेंडेंसी भी रिकॉर्ड स्तर पर है। दो हजार से अधिक जमानतों की पेंडेंसी को निपटाने फिलहाल उच्च न्यायालय में 4 जज जमानत अर्जियों पर सुनवाई कर रहे हैं। उच्च न्यायालय की वेबसाइट के आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर माह के अंत तक सिविल के 2,86,498 और क्रिमिनल के 1,96,332 मामले लंबित हैं। जानकार बताते हैं कि वर्ष 2025 में 15 नए जजों की नियुक्ति से उम्मीद जगी थी कि पेंडेंसी में तेजी से कमी आएगी, लेकिन बड़ी संख्या में नए केसों के आने और पुराने केसों के निपटारे की धीमी गति होने से लंबित मुकदमों का आंकड़ा यथावत बना हुआ है।
