भोपाल। शहर को स्मार्ट बनाने के लिए शुरू किए गए स्मार्ट सिटी मिशन को करीब एक दशक पूरा होने जा रहा है। वर्ष 2016 में शुरू हुई इस योजना के तहत भोपाल में 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए जा चुके हैं। टीटी नगर के 342 एकड़ क्षेत्र को आधुनिक सुविधाओं से विकसित करने के साथ बेहतर सड़क, ट्रैफिक, पार्किंग, कचरा प्रबंधन और आईटी आधारित सेवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था।
इस दौरान अटल पथ, स्मार्ट रोड, मल्टीलेवल पार्किंग, आईडीआरसीसी, स्मार्ट पार्क और कचरा ट्रांसफर स्टेशन जैसी कई परियोजनाएं तैयार की गईं। इन प्रोजेक्ट्स से शहर के कई हिस्सों में बदलाव देखने को मिला, लेकिन स्मार्ट सिटी मिशन की पूरी परिकल्पना को लेकर अब भी सवाल बने हुए हैं।
साइकिल शेयरिंग, स्मार्ट पोल, अंडरग्राउंड डस्टबिन और हाट बाजार जैसी कुछ योजनाओं में सामने आई खामियों के बीच यह सवाल अहम हो जाता है कि आखिर इतने बड़े बजट के बाद भोपाल कितना स्मार्ट हुआ?
इस बीच भोपाल नगर निगम के पूर्व सहायक आयुक्त जी.पी. माली ने फोन पर बातचीत में स्मार्ट सिटी की प्लानिंग को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई। उनके मुताबिक, सीमित जमीन में पूरे शहर को स्मार्ट बनाने की परिकल्पना को पूरा करना मुश्किल था और प्रोजेक्ट में शुरुआत से ही कुछ कमियां थीं।
हालांकि, स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कई परियोजनाएं पूरी हुई हैं, लेकिन अब बहस इस बात पर है कि इन योजनाओं का वास्तविक लाभ शहर के लोगों तक कितना पहुंचा और तय लक्ष्य किस हद तक हासिल हुआ।
इस तीन-पार्ट सीरीज के पहले हिस्से में समझिए—भोपाल के स्मार्ट सिटी मिशन का सफर, 1000 करोड़ से ज्यादा का खर्च और इस प्रोजेक्ट को लेकर उठ रहे बड़े सवाल।
अगले पार्ट में जानिए—भोपाल की जनता स्मार्ट सिटी को किस नजर से देखती है और इन योजनाओं का उन्हें कितना फायदा मिला।
