जबलपुर: अभियोजन अधिकारियों की कार्यदक्षता बढ़ाने और बदलते तकनीकी एवं न्यायिक परिदृश्य से अवगत कराने के उद्देश्य से एक दिवसीय संभाग स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें डीएनए, साइबर अपराध, साइबर सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी।कार्यशाला का शुभारंभ उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति द्वारिकाधीश बंसल, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कृष्णमूर्ति मिश्रा, कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह, पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय तथा अभियोजन विभाग के अधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
आरोपी, पीड़ित और राज्य के प्रति निष्पक्ष रहे अभियोजन
न्यायमूर्ति द्वारिकाधीश बंसल ने अभियोजन के कर्तव्यों एवं अधिकारों पर प्रकाश डालते हुए कहा की अभियोजन को आरोपी, पीड़ित और राज्य—तीनों के प्रति निष्पक्ष रहना चाहिए। उन्होंने न्यायालय में गवाहों के पक्ष विरोधी हो जाने की परिस्थितियों और उनसे जुड़े कानूनी पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा की कार्यशालाओं के माध्यम से अधिकारियों की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी और वे निष्पक्षता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।
कार्यशाला में कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने डिजिटल साक्ष्यों के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा की वर्तमान समय में अपराधों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। वहीं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कृष्णमूर्ति मिश्रा ने साइबर अपराधों के बढ़ते स्वरूप पर चिंता जताई और कहा की डीएनए तथा साइबर अपराध जैसे विषयों पर प्रशिक्षण से अभियोजन को मजबूती मिलेगी।
ओटीपी और एपीके फाइल से ठगी पर चर्चा
पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने ओटीपी धोखाधड़ी और एपीके फाइल के जरिए होने वाली ठगी के मामलों की जानकारी दी। उन्होंने साइबर अपराधों के अनुसंधान में आने वाली चुनौतियों, डिजिटल माध्यमों से होने वाली धोखाधड़ी और आरोपियों तक पहुंचने में आने वाली कठिनाइयों पर प्रकाश डाला। साथ ही साइबर अपराध की तत्काल सूचना के लिए 1930 के संबंध में जानकारी दी।
मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के यशपाल सिंह सिसोदिया ने साइबर अपराध, साइबर सुरक्षा एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पर विस्तृत व्याख्यान दिया। आरएफएसएल जबलपुर के डीएनए विशेषज्ञ डॉ. पंकज श्रीवास्तव ने डीएनए एवं न्यायालयिक विज्ञान के महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी।इस मौके पर उप निदेशक अभियोजन महेंद्र सिंह गौतम ने विभागीय जांच के नियम एवं प्रक्रिया पर प्रकाश डाला।
आठ जिलों के अभियोजन अधिकारी हुए शामिल
कार्यशाला में छिंदवाड़ा, बालाघाट, सिवनी, नरसिंहपुर, कटनी, मंडला, डिंडोरी और जबलपुर के अभियोजन अधिकारी, लोक अभियोजक, अपर लोक अभियोजक, पुलिस Iउइअधिकारी एवं अभियोजन संचालनालय के कर्मचारी शामिल हुए। कार्यशाला का आयोजन महानिदेशक लोक अभियोजन भोपाल शिल्पा गुप्ता के मार्गदर्शन में उप निदेशक अभियोजन के.एस. मुवेल द्वारा कराया गया।
