ईरान, 23 अगस्त (वार्ता) ईरान के नये सुरक्षा प्रमुख ने रविवार को चेतावनी दी कि यदि खाड़ी देश अमेरिका के आर्थिक दबाव अभियान में सहयोग करते हैं तो ईरान संघर्ष का दायरा बढ़ाने के लिए तैयार है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही रोकने और तेल निर्यात के वैकल्पिक मार्गों को निशाना बनाने की भी धमकी दी।
यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका ईरान के खिलाफ अपना आर्थिक अभियान तेज करने की तैयारी कर रहा है।
अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट सोमवार को संवाददाता सम्मेलन करने वाले हैं। उन्होंने ईरान के खिलाफ ऐसे कदम उठाने का वादा किया है, “जिन्हें पहले कभी नहीं देखा गया।”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान के खिलाफ ‘आर्थिक डी-डे’ शुरू करने की धमकी दी है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रजाई ने सरकारी मीडिया से कहा कि ईरान क्षेत्र में युद्ध का विस्तार नहीं चाहता, लेकिन पड़ोसी देश यदि अमेरिका की मदद करते हैं तो ईरान इसका जवाब देगा। उन्होंने कहा, “ईरान क्षेत्र में युद्ध का विस्तार नहीं चाहता, लेकिन यदि ईरान के पड़ोसी देश आर्थिक युद्ध में अमेरिकियों के साथ सहयोग करते हैं तो हम उनके हितों को निशाना बनाएंगे। यदि उन्होंने ऐसा कदम उठाना शुरू किया तो हम फारस की खाड़ी से तेल की एक बूंद भी गुजरने नहीं देंगे।”
उन्होंने खाड़ी से तेल निर्यात के लिए इस्तेमाल होने वाले वैकल्पिक मार्गों को भी निशाना बनाने की चेतावनी दी। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने ऐसे वैकल्पिक मार्गों का विस्तार किया है, जिनके जरिए कुछ तेल निर्यात लाल सागर और ओमान की खाड़ी स्थित बंदरगाहों से किया जा रहा है।ईरान के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल श्री रजाई ने कहा कि अमेरिका का अधिकतम आर्थिक दबाव अभियान विफल होगा। यह ऐसे समय में ईरान के कट्टरपंथी नेतृत्व के समझौता करने को तैयार नहीं होने का एक और संकेत है, जब देश गहरे आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।
श्री रजाई ने एक साक्षात्कार में कहा, “दुनिया समझ चुकी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बयानबाजी महज खोखली बातें हैं। हम युद्ध के संचालन, कूटनीति और राजनीतिक एवं सामाजिक मामलों में बदलाव देखेंगे और नई क्षमताओं को इस्तेमाल में लाया जाएगा।”
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति और ईरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर कब्जे के बाद से अमेरिका ने उस पर प्रतिबंध लगा रखे हैं।
कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रतिबंधों का इस्तेमाल “ईरानी शासन के प्रतिकूल व्यवहार को रोकने, सीमित करने और उसमें बदलाव के लिए प्रोत्साहित करने” के उद्देश्य से किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध संभवतः किसी भी देश पर अमेरिका द्वारा लगाए गए सबसे व्यापक प्रतिबंधों में शामिल हैं।
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के सलाहकार श्री रजाई ने कहा कि ईरान अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा और जब तक अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा। शिपिंग आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ओमान के करीब दक्षिणी मार्ग के जरिए खाड़ी से अधिक मात्रा में कच्चा तेल बाहर जा रहा है। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का दबाव कुछ कम हो सकता है।
ईरान-इराक युद्ध के दौरान 1980 के दशक में वरिष्ठ कमांडर रहे श्री रजाई को इस महीने देश का नया सुरक्षा प्रमुख नियुक्त किया गया था। इसे ईरान की ओर से अधिक आक्रामक रुख अपनाने की दिशा में बदलाव के रूप में देखा गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान पर अमेरिकी हमले से दूसरे देशों में परमाणु हथियार हासिल करने की इच्छा बढ़ी है।
श्री रजाई ने कहा, “ईरान पर हमला करने की ट्रंप की मूर्खता ने दुनियाभर के लोगों में परमाणु हथियार हासिल करने की इच्छा बढ़ा दी है, खासकर तब जब उन्होंने देखा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) और परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) की सदस्यता भी अमेरिकी हमले को रोकने में कुछ नहीं कर सकी।”
ईरान के सुरक्षा प्रमुख की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की पूरी आवाजाही रोकने की धमकी दी गई है। सरकारी समर्थन वाले प्रेस टीवी के अनुसार, इससे अमेरिका के साथ पहले से बढ़ते टकराव के बीच तनाव और बढ़ गया है।
