
भोपाल। मध्यप्रदेश के शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने प्राचार्य, उप प्राचार्य और आवश्यक शिक्षकीय स्टाफ की कमी के साथ ही मान्यता के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं।
रविवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश के 22 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों ने मान्यता के लिए आवेदन किया था, लेकिन इनमें से तीन भोपाल का बीएमएचआरसीके नर्सिंग कॉलेज, अनूपपुर स्थित अमरकंटक विश्वविद्यालय का शासकीय नर्सिंग कॉलेज और दतिया का शासकीय नर्सिंग कॉलेज को मान्यता नहीं मिल सकी।
परमार ने दावा किया कि छह शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में प्राचार्य नहीं हैं, जबकि 10 कॉलेज उप प्राचार्य के बिना संचालित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई संस्थानों में 2018 के राज्य मान्यता नियमों के अनुरूप प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और ट्यूटर भी उपलब्ध नहीं हैं।
उन्होंने कुछ कॉलेजों द्वारा कथित रूप से फर्जी अथवा कूटरचित अनुभव प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किए जाने का आरोप भी लगाया। बीएमएचआरसीके के संबंध में उन्होंने दावा किया कि एक असिस्टेंट प्रोफेसर को उप प्राचार्य तथा उप प्राचार्य को एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में दर्शाया गया।
अधिवक्ता अभिषेक पांडे ने कहा कि पूर्व में सीबीआई जांच के दौरान भी नर्सिंग कॉलेजों में कमियां सामने आई थीं। उन्होंने बताया कि जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।
एनएसयूआई ने निष्पक्ष जांच और सुधारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी है।
