जाति की राजनीति में भविष्य तलाशना है या प्रतिभा, अरुणेश सिंह का सवाल

ग्वालियर: जनशक्ति वेलफेयर सोसायटी के संस्थापक अध्यक्ष एवं समाजसेवी अरुणेश सिंह भदौरिया ने देश में बढ़ती जातिगत राजनीति और आरक्षण को लेकर चल रहे विवादों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भारत को अब गंभीरता से यह तय करना होगा कि देश का भविष्य जाति और आरक्षण की राजनीति में तलाशना है या प्रतिभा, शिक्षा, कौशल, उद्योग, रोजगार और उत्पादन में। भदौरिया ने कहा कि भारत 1947 में स्वतंत्र हुआ, जबकि चीन में नई राजनीतिक व्यवस्था 1949 में स्थापित हुई।

इसके बावजूद आज चीन की अर्थव्यवस्था भारत से कई गुना बड़ी है। इसके पीछे लंबे समय तक उद्योग, विनिर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर, निर्यात और तकनीक पर लगातार दिया गया जोर भी एक प्रमुख कारण है।अरुणेश सिंह भदौरिया ने कहा, ‘भारत को चीन जैसी तानाशाही नहीं चाहिए, लेकिन मजबूत कानून-व्यवस्था, जवाबदेही और परिणाम देने वाली शासन व्यवस्था की आवश्यकता जरूर है।‘ आरक्षण के विषय पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी वंचित वर्ग का अधिकार छीनना नहीं है। उनका कहना है कि देश में इस बात पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए कि सरकारी सहायता और अवसरों का आधार केवल जाति रहे या आर्थिक स्थिति और वास्तविक सामाजिक वंचितता को भी प्रमुख आधार बनाया जाए।

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