
सीधी। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा महर्षि अरविंद घोष की जन्म जयंती पखवाड़े के अंतर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र सीधी में जिला स्तरीय व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महर्षि अरविंद के जीवन, राष्ट्रचिंतन, आध्यात्मिक दर्शन एवं उनके विचारों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सीधी विधायक रीती पाठक रहीं। अध्यक्षता मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के शासी निकाय सदस्य कृष्णकांत द्विवेदी ने की। जिला पंचायत अध्यक्ष मंजू सिंह विशिष्ट अतिथि रहीं। कार्यक्रम में संभाग समन्वयक प्रवीण पाठक, संभाग अनुश्रवण एवं मूल्यांकन अधिकारी आनंद पाण्डेय तथा जिला समन्वयक मुकेश गौर की विशेष उपस्थिति रही। मुख्य अतिथि विधायक रीती पाठक ने कहा कि महर्षि अरविंद ने शिक्षा को व्यक्ति के सर्वांगीण विकास का माध्यम माना। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा का विकास करे। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को महर्षि अरविंद के शिक्षा संबंधी विचारों से प्रेरणा लेकर ज्ञान के साथ संस्कार, चरित्र और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी को भी जीवन में अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महर्षि अरविंद का चिंतन आज भी प्रासंगिक है क्योंकि उन्होंने आध्यात्मिकता को राष्ट्रसेवा और मानव कल्याण से जोड़ा। उनके विचार युवाओं में सकारात्मक सोच और नेतृत्व क्षमता विकसित करने में सहायक हो सकते हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष मंजू सिंह ने कहा कि महर्षि अरविंद के विचारों में आध्यात्मिक चेतना के साथ सामाजिक दायित्व की भावना भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने युवाओं से महर्षि अरविंद के जीवन एवं विचारों से प्रेरणा लेकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनने का आह्वान किया। संभाग समन्वयक प्रवीण पाठक ने कहा कि महर्षि अरविंद का चिंतन हमें संदेश देता है कि राष्ट्र निर्माण की शुरुआत व्यक्ति के निर्माण से होती है। महर्षि अरविंद ने युवाओं में राष्ट्रीय चेतना जागृत करने पर विशेष बल दिया था। कार्यक्रम में नवांकुर, प्रस्फुटन प्रभारी आनंद पाण्डेय, विखं समन्वयक अनिल पाठक, प्रभु दयाल दहिया, पुष्पराज सिंह, पंकज पाण्डेय, जगदम्बा सोनी, कंचन केशरी, छात्र-छात्राएं तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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राष्ट्र को जीवंत शक्ति मानते थे महर्षि अरंविद: कृष्णकांत
मुख्य वक्ता कृष्णकांत द्विवेदी ने कहा कि महर्षि अरविंद के राष्ट्रवाद की अवधारणा अत्यंत व्यापक थी। वे भारत को केवल भूमि का एक टुकड़ा नहीं बल्कि एक जीवंत राष्ट्रशक्ति मानते थे। उनका विचार था कि राष्ट्र का उत्थान केवल राजनीतिक स्वतंत्रता से नहीं बल्कि व्यक्ति के चरित्र, चेतना और आत्मिक विकास से संभव है। उन्होंने कहा कि महर्षि अरविंद का दर्शन व्यक्ति की श्रेष्ठ शक्तियों के विकास और उन्हें समाज एवं राष्ट्र के कल्याण में लगाने की प्रेरणा देता है।
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कार्यक्रम में दिलाई शपथ और हुआ पौधरोपण
कार्यक्रम के दौरान नशे के दुष्प्रभावों के प्रति उपस्थितजनों को जागरूक किया गया। इसके बाद सभी उपस्थितजनों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम के समापन अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत त्रिवेणी का पौधारोपण किया गया। इस अवसर पर उपस्थितजनों ने पर्यावरण संरक्षण और पौधों की देखभाल का संकल्प भी लिया।
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