इंदौर: भाई-बहन के रिश्ते में मिठास घोलने वाला रक्षाबंधन इस बार शक्कर की तेजी से कुछ फीका पड़ता नजर आ रहा है. त्योहार से पहले शक्कर के भाव लगातार बढ़ते हुए रिटेल में 65 रुपए प्रति किलो से ऊपर पहुंच गए हैं. थोक बाजार में भाव करीब 58 से 60 रुपए किलो बताए जा रहे हैं.सामान्य दिनों और पिछले त्योहार सीजन की तुलना में इस तेजी ने घर की रसोई से लेकर मिठाई कारोबार तक का बजट बिगाड़ दिया है. खास बात यह है कि कारोबारियों के अनुसार इस समय शक्कर में तेजी का असर केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पादन और आपूर्ति से जुड़े कारणों का असर व्यापक बाजार पर दिखाई दे रहा है.
शक्कर की तेजी के पीछे उत्पादन और स्टाफ की कमी
सियागंज के व्यापारी संदीप पटवा के मुताबिक शक्कर के उत्पादन में कमी और स्टाफ की कमी के कारण बाजार में तेजी आई है. गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में इस बार उत्पादन कम रहने का असर आपूर्ति पर पड़ा है. उन्होंने कहा कि भारत के साथ ब्राजील में भी उत्पादन को लेकर स्थिति प्रभावित हुई है. इसके अलावा शक्कर का उपयोग एथेनॉल उत्पादन में बढ़ने से भी बाजार पर असर पड़ रहा है. पटवा के अनुसार फिलहाल शक्कर के फ्यूचर में ऊंचे भाव बने रहने की संभावना है. वहीं मनीष बिसानी ने बताया कि मांग बढ़ने और आपूर्ति कम होने से शक्कर के भाव बढ़े हैं. उनके अनुसार थोक में 58 से 60 रुपए और रिटेल में 65 रुपए से अधिक भाव चल रहा है. उन्होंने कहा कि तेजी के पीछे कोई एक बड़ा कारण नहीं है, लेकिन आयात नहीं होने और आपूर्ति प्रभावित रहने से बाजार में दबाव बना हुआ है. आमतौर पर त्योहार सीजन में शक्कर का औसत भाव करीब 40 रुपए के आसपास रहता है, लेकिन इस बार स्थिति अलग है.
मिठाई की लागत बढ़ी, कारोबारियों की चिंता बढ़ी
शक्कर की कीमत बढ़ने का सीधा असर मिठाई और होटल कारोबार पर भी पड़ रहा है. होटल संचालक कोमल का कहना है कि पहले से महंगाई का दबाव है. शक्कर महंगी होने के बाद लागत और बढ़ गई है. कारोबारियों के लिए तत्काल मिठाई या खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ाना आसान नहीं है, क्योंकि इसका सीधा असर ग्राहकों की खरीदारी पर पड़ सकता है. यदि कीमतें बढ़ती हैं तो बिक्री प्रभावित होने की आशंका है. मिठाई कारोबारियों के लिए रक्षाबंधन जैसे सीजन में शक्कर सबसे जरूरी कच्चे माल में शामिल है. ऐसे में इसके दाम में 20-25 रुपए तक की तेजी लागत पर असर डाल रही है. कारोबारियों को अब लागत संभालने और ग्राहकों को कीमतों के झटके से बचाने के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है.
गृहणियों का बजट भी बिगड़ा
गृहणी पूनम ठाकुर के मुताबिक त्योहारों पर घर में मिठाई और पकवान बनाने के लिए शक्कर की खपत बढ़ जाती है. ऐसे में अचानक भाव बढ़ने से मध्यवर्गीय परिवारों का बजट प्रभावित होता है. उन्होंने कहा कि इस बार रक्षाबंधन पर कई परिवारों को जरूरत के हिसाब से खरीदारी में कटौती करनी पड़ सकती है.
राखी की मिठास पर महंगाई की परत
रक्षाबंधन पर मिठाई, दूध, ड्राई फ्रूट्स और अन्य सामग्री की मांग पहले ही बढ़ जाती है। ऐसे में शक्कर का 65 रुपए पार पहुंचना त्योहार के खर्च में एक और इजाफा कर रहा है। घर में बनने वाली मिठाई महंगी हो रही है तो बाजार की मिठाई की लागत भी बढ़ रही है. यानी शक्कर की तेजी का असर केवल एक किलो चीनी की खरीद तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी त्योहार की खरीदारी पर पड़ने वाला है. भाई की कलाई पर राखी बांधने और मुंह मीठा कराने की तैयारी के बीच इस बार बाजार का सबसे बड़ा सवाल यही है—त्योहार की मिठास बढ़ेगी या शक्कर के बढ़ते भाव उसकी मिठास को और फीका करेंगे
