सीहोर। अतिवृष्टि और कीट प्रकोप से सोयाबीन की फसल बर्बाद होने से परेशान सिराड़ी, रासलाखेड़ी, चंदेरी सहित आसपास के गांवों के सैकड़ों किसान शुक्रवार को खराब सोयाबीन के पौधे हाथों में लेकर ट्रैक्टर-ट्रालियों से सीहोर पहुंचे और कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर जोरदार नारेबाजी की और तत्काल फसल सर्वे कराने, उचित मुआवजा दिलाने तथा लंबित फसल बीमा राशि का भुगतान कराने की मांग की. किसानों के प्रदर्शन से कलेक्ट्रेट परिसर में गहमागहमी का माहौल रहा.
शुक्रवार को किसान तीन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में खराब सोयाबीन की फसल लेकर रैली के रूप में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे. किसानों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर के नाम ज्ञापन सौंपा. इसके बाद किसान कृषि कल्याण विभाग के कार्यालय पहुंचे और वहां भी अधिकारियों को मांग पत्र सौंपते हुए धरने पर बैठ गए.
किसानों का कहना है कि इस वर्ष लगातार बारिश और अतिवृष्टि के कारण खेतों में सोयाबीन की फसल प्रभावित हुई है. वहीं कई खेतों में कीट प्रकोप के कारण पौधों में फलियां विकसित नहीं हो रही हैं और फसल बांझ हो गई है. सैकड़ों एकड़ में खड़ी फसल खराब होने से किसानों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. किसानों ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर फसल की बोवनी की थी, लेकिन अब खेतों में खड़ी फसल देखकर उनकी मेहनत और लागत डूबती नजर आ रही हैं.
किसानों ने मांग की कि खराब सोयाबीन की फसल का निष्पक्ष व पारदर्शी सर्वे कराया जाए. सर्वे रिपोर्ट के आधार पर किसानों को मुआवजा और बीमा राशि तत्काल उपलब्ध कराई जाए. किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई और लंबित बीमा राशि का भुगतान नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा.
तीन साल की बीमा राशि देने की उठाई मांग
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने वर्ष 2024, 2025 और 2026 की फसल बीमा राशि दिलाने की मांग की. किसानों का कहना है कि पिछले वर्षों में फसल खराब होने पर कुछ किसानों को तहसील स्तर से करीब पांच हजार रुपये तक राहत राशि मिली, लेकिन फसल बीमा की राशि सभी पात्र किसानों को अब तक नहीं मिली है. कुछ गांवों में बीमा राशि का भुगतान हुआ है, जबकि कई किसान अभी भी इससे वंचित हैं. किसानों ने सवाल उठाया कि बैंक द्वारा समय पर उनके खातों से फसल बीमा का प्रीमियम काटकर बीमा कंपनी को भेज दिया जाता है, लेकिन फसल खराब होने के बाद बीमा राशि के लिए किसानों को भटकना पड़ता है। किसानों ने मांग की कि जिन किसानों का प्रीमियम काटा गया है, उन्हें नियमानुसार बीमा का लाभ दिया जाए. किसानों ने कहा या तो उन्हें बीमा का लाभ दो या फिर प्रीमियम काटना बंद करो.
