
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद के उपाध्यक्ष तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय हैं। सदस्य राज्यों में से किसी एक राज्य के मुख्यमंत्री बारी-बारी से परिषद के उपाध्यक्ष होते हैं। यह बैठक गृह मंत्रालय के अंतर-राज्य परिषद सचिवालय द्वारा तमिलनाडु सरकार की मेज़बानी में आयोजित की जा रही है। इसमें दक्षिणी क्षेत्र के सदस्य राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री या उप-राज्यपाल या प्रशासक के साथ-साथ प्रत्येक राज्य से दो वरिष्ठ मंत्री भाग लेंगे। राज्य सरकारों के मुख्य सचिव या सलाहकार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में भाग लेंगे। क्षेत्रीय परिषद ने मुख्य सचिवों के स्तर पर एक स्थायी समिति का भी गठन किया है। राज्यों द्वारा प्रस्तावित मुद्दों को पहले क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति के समक्ष चर्चा के लिए प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें विचारों के बाद शेष बचे मुद्दों को क्षेत्रीय परिषद की बैठक में विचार के लिए प्रस्तुत किया जाता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सहकारी संघवाद के आधार पर देश के सामने टीम भारत की कल्पना रखी है और क्षेत्रीय परिषदें इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। क्षेत्रीय परिषदें मजबूत राज्य ही मजबूत राष्ट्र बनाते हैं की भावना से काम करती हैं। परिषदें दो या अधिक राज्यों अथवा केंद्र और राज्यों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर, संवाद और चर्चा के लिए एक व्यवस्थित तंत्र, तथा इसके जरिये आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए मंच प्रदान करती हैं। क्षेत्रीय परिषद की बैठकें संवाद से समाधान का सशक्त मंच बनी हैं
क्षेत्रीय परिषदों की भूमिका सलाहकार के रूप में होती है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ये परिषदें विभिन्न क्षेत्रों में आपसी समझ और सहयोग के संबंध को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण कारक साबित हुई हैं। सभी राज्य सरकारों, केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के सहयोग से पिछले लगभग बारह वर्षों में, जून 2014 से अब तक, विभिन्न क्षेत्रीय परिषदों और इनकी स्थायी समितियों की कुल 69 बैठकें आयोजित हुईं है।
क्षेत्रीय परिषदें, केंद्र , सदस्य राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के बीच क्षेत्रीय मुद्दों और विवादों को हल करने तथा उन में प्रगति के लिए श्रेष्ठ मंच प्रदान करती है। ये परिषदें राष्ट्रीय महत्व के व्यापक मुद्दों पर भी चर्चा करती हैं जिनमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ दुष्कर्म के मामलों की त्वरित जांच और इनके शीघ्र हल के लिए फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों का कार्यान्वयन और शिक्षा से संबंधित मुद्दे आदि शामिल हैं।
