
उन्होंने बताया कि यह मार्ग सोनबरसा में भारत-नेपाल सीमा को राष्ट्रीय राजमार्ग-27 स्थित मुजफ्फरपुर से जोड़ता है और बिहार के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग के रूप में सामने आता है। इससे मुजफ्फरपुर, मकसूदपुर, रुन्नीसैदपुर, थुम्मा, डुमरा, भुतही और सोनबरसा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम होगा तथा यात्रियों और माल की आवाजाही के समय की बचत होगी तथा यात्रा को ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सकेगा। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि परियोजना को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति और 80 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत गति के अनुरूप विकसित किया जायेगा। इसमें बीच में सड़क पार करने के लिए कोई खुला मार्ग नहीं होगा, जिससे यातायात सुगम और सुरक्षित रहेगा। परियोजना के तहत सात बड़े पुल, तीन रेलवे ऊपरगामी पुल और दो फ्लाईओवर बनाए जाएंगे।
इनमें बागमती नदी पर 340 मीटर लंबा बड़ा पुल भी शामिल है। श्री वैष्णव ने बताया कि परियोजना से औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख रेलवे स्टेशनों समेत आर्थिक, सामाजिक और माल परिवहन से जुड़े महत्वपूर्ण केंद्रों को बेहतर संपर्क मिलेगा। इससे कृषि उत्पादों की आपूर्ति और माल की आवाजाही सुगम होगी तथा क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
इसके निर्माण से बौद्ध परिपथ और सीतामढ़ी स्थित ऐतिहासिक जानकी पुनौरा धाम जैसे प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों तक पहुंच बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग-31 और राष्ट्रीय राजमार्ग-122 जैसे मार्गों के साथ सड़क संपर्क का विस्तार होगा और बरौनी के औद्योगिक क्षेत्रों, गंगा के किनारे स्थित माल परिवहन केंद्रों तथा भिठामोड़ स्थित भू-सीमा बंदरगाह के जरिए सीमा पार यात्रियों और माल की आवाजाही को भी सुविधा मिलेगी। परियोजना से यात्रा की औसत गति बढ़ने, यात्रा समय घटने, सड़क सुरक्षा में सुधार और ईंधन तथा वाहनों के परिचालन खर्च में कमी आने की उम्मीद है। इससे बिहार के पांच पीएम गति शक्ति आर्थिक केंद्रों, चार सामाजिक केंद्रों और दो माल परिवहन केंद्रों को भी बेहतर संपर्क मिलेगा।
