मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास
संसद में समर्थन के लिए दो तिहाई संख्या पूरी न होते देख केंद्र की मोदी सरकार ने फिलहाल विदेशी फंडिेग के गलत इस्तेमाल पर अंकुश लगाने वाला एफसीआरए बिल टाल दिया है, मगर इस बिल के आने से ही देवास, खरगोन, बड़वानी में कार्यरत एनजीओ की धडक़नें बढ़ गई ओर कर्ताधर्ताओं में बैचेनी साफ नजर आ रही है. यदि यह बिल पास होता है तो अंचल में कार्यरत समाज प्रगति सहयोग संस्था (एसपीएस) पर सबसे ज्यादा असर होगा. दशकों पहले देवास जिले की बागली तहसील के छोटे से कस्बे जटाशंकर में जन्मी इस संस्था ने देखते देखते अपना विस्तार देवास, बड़वानी, खरगोन होते हुए समीपवर्ती महाराष्ट्र के गांवों तक कर लिया. बताया जाता है कि संस्था ने अपनी विस्तारित शाखाओं के माध्यम से गांव-गांव में करीब 40 हजार महिला समूहों को जोड़ रखा है. यह ग्रामीण जल सुरक्षा और आजीविका के क्षेत्र में काम करती है . आरोप लगते रहे हैं कि करोड़ों रुपए की विदेशी फंडिंग का उपयोग आंदोलनों के लिए किया जाता रहा है. चर्चा है कि इस एफसीआरए बिल के आने से फंड के इस्तेमाल से पारदर्शिता रखनी होगी, हिसाब-किताब होगा, मनमाने लेन-देन पर अंकुश रहेगा .
कार्य कलापों पर सवालिया निशान
बागली मुख्यालय से संचालित समाज प्रगति सहयोग संस्था की मालवा- निर्माण क्षेत्र में विस्तार से फैली शाखाओं में ज्यादातर महिला समूह कार्य कर रहे हैं. बताया जाता है कि बाबा आमटे और नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रमुख मेघा पाटेकर द्वारा सिंचित यह संस्था वर्तमान में प्रतिवर्ष एक अरब रुपए से अधिक का वित्तीय लेनदेन करती है. इसी श्रृंखला में रानी मारिया फाउंडेशन भी इस क्षेत्र में विस्तार पूर्वक अपनी जगह बना चुका है, जिसके तहत स्कूल, अस्पताल और अन्य आश्रम संचालित हैं. यदि यह कानून लागू होता है तो एक लाख से अधिक कर्मचारी भी प्रभावित होंगे. हालांकि इन संस्थानों में वित्तीय लेनदेन अभी तक चल रहे कानून के तहत विदेशों से प्राप्त फंडिंग से ही होता ह, ै लेकिन एफसीआरए बिल के दायरे में आने से बहुत कुछ अंकुश लग जाएगा. वर्तमान में समाज प्रगति सहयोग के छोटे से छोटे समूह लाखों रुपए का दान भी करते हैं. हाल ही में आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र पुंजापुर में 7 लाख रुपए की कापी किताब प्रगति समाज समूह द्वारा वितरित की गई, जिसके पीछे बताया गया कि यह सभी महिलाओं की बचत का अंश है, जबकि वास्तविक स्थिति में कई समूह घाटे में चल रहे हैं. कुछ महिलाएं और सदस्य लोन लेकर चुका नहीं पा रहे इसके चलते उनकी घाटा पूर्ति कैसे होती है इस पर सवालिया निशान है.
जीतू ने बदहाली पर जनप्रतिनिधियों को घेरा
मादक पदार्थ प्रकरण में घिरे भाई के कारण बैकफुट पर आए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी कश्मकश भरी दतिया विधान सभा सीट पर उपचुनाव जिताने के बाद उत्साह से भरे हैं. कांग्रेस आलाकमान की नजरों में उनके अंक बढऩे से उनमें पुन: आत्म विश्वास के संचार हुआ है. वे पूरे चुनाव के दौरान दतिया में ही डटे रहे, भाई पर मुसीबत के बाद भी मैदान नहीं छोड़ा था. अब उन्होंने इंदौर की राजनीति की ओर रुख कर लिया है. स्थानीय भाजपा को घेरने के लिए उन्होंने पूरे शहर में खुदाई के बाद खो गई सडक़ों और उससे परेशान नागरिक व आधे-अधूरे पड़े विकास कार्यों से शहर की बदहाली को मुद्दा बनाया है. जीतू पटवारी ने सवाल किया है कि इंदौर ने भाजपा को एक तरफ़ा बहुमत दिया, किंतु बदले में क्या मिला? विधायक निधि के 63 प्रतिशत काम अभी तक शुरू ही नहीं हुए! यह कैसी व्यवस्था है, जहां टेंडर मंजूर होने के बावजूद काम अटका है? क्या यह भाजपाइयों की राजनीतिक उदासीनता का नतीजा नहीं? साथ ही उन्होंने इंदौरवासियों से कहा है कि सांसद/विधायकों से पूछें – मेरे क्षेत्र का विकास क्यों रुका है? विधायक निधि का पैसा कहां गया?
