वाशिंगटन/तेहरान, 18 अगस्त (वार्ता) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को ईरान के साथ पिछले दरवाजे से किसी भी तरह की बातचीत के दावों को सिरे से खारिज कर दिया।
श्री ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ न तो कोई द्विपक्षीय बातचीत चल रही है और न ही आगे ऐसी किसी बैठक का कार्यक्रम तय है।
इससे ठीक एक दिन पहले हालांकि उन्होंने दावा किया था कि उनके प्रशासन ने ईरान की शक्तिशाली अर्धसैनिक इकाई आईआरजीसी से पिछले दरवाजे से संपर्क स्थापित कर लिया है।
श्री ट्रम्प ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है, न ही कोई वार्ता तय है। हमारी नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह से लागू है। होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है और काम कर रहा है। पानी में बिछायी गयी सभी माइन्स को हटा या निष्क्रिय कर दिया गया है।”
इससे एक दिन पहले फॉक्स न्यूज को दिए साक्षात्कार में श्री ट्रम्प ने कहा था कि उनके प्रशासन ने आईआरजीसी के साथ संपर्क साधा है और ईरानी अधिकारी “अच्छे पोकर खिलाड़ी हैं, लेकिन वे संकट में हैं।”
आईआरजीसी ने भी अमेरिका के साथ किसी भी गुप्त बातचीत से साफ इनकार किया है। वहीं, ट्रम्प का यह ताजा बयान उनके विशेष दूत जेरेड कुशनर के उस आकलन के विपरीत है, जिसमें श्री कुशनर ने सोमवार को फॉक्स न्यूज से कहा था कि अमेरिकी सरकार और ईरानी शासन के अलग-अलग विभागों के बीच बातचीत काफी सक्रिय और सकारात्मक दौर में है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने इस दावे को भी दोहराया कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में माइन्स हटाने का अभियान पूरा कर लिया है और यह जलमार्ग खुला हुआ है, हालांकि जमीनी स्थिति यह है कि इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही सामान्य से काफी कम है और ईरान लगातार कह रहा है कि यह जलमार्ग पूरी तरह से नहीं खुला है।
दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्वीकार किया कि पिछला एक वर्ष कूटनीतिक रूप से देश के लिए सबसे कठिन दौर रहा है, लेकिन इसके परिणामस्वरूप ईरान की एक नयी और अधिक आक्रामक विदेश नीति का निर्माण होगा।
एक टीवी साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि इस युद्ध ने ईरान की सैन्य शक्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण को मौलिक रूप से बदल दिया है और भारी दबाव के बावजूद ईरान ने अपनी दृढ़ता साबित की है।
श्री अराघची ने कहा कि युद्ध के बाद के दौर में ईरान की विदेश नीति पहले की तुलना में पूरी तरह से अलग होगी और ईरान को कमजोर समझने की धारणा अब खत्म हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि युद्ध की शुरुआत में श्री ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’ की बात कही थी, लेकिन जब अमेरिका ईरान को झुकाने या युद्ध का त्वरित अंत करने में विफल रहा, तो उसने सत्ता परिवर्तन और आंतरिक अशांति फैलाने की रणनीति पर ध्यान केंद्रित कर दिया। इसमें भी उसे नाकामी मिली।
