
इस अभियान में 28 कैडेट भाग ले रही हैं, जिनकी औसत आयु 19 वर्ष है और सबसे कम उम्र की प्रतिभागी मात्र साढ़े 16 वर्ष की है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने इतने चुनौतीपूर्ण अभियान में युवा लड़कियों की भागीदारी को देश की महिलाओं के साहस, दृढ़ संकल्प और बढ़ती क्षमताओं का सशक्त प्रमाण बताया। चिकित्सा कर्मियों, अधिकारियों, प्रशिक्षकों और सहायक कर्मचारियों के साथ यह अभियान दल हिमालय के कुछ सबसे दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण इलाकों से होते हुए लगभग 250 किलोमीटर की दूरी 30 दिनों में तय करेगा। अभियान के मार्ग में किब्बर, दुमला, थलटक, बोंगरोजेन, परांग ला दर्रा, डाक कारज़ोंग, नोर्बू सुम्दो, कियांगडोम और कोरज़ोक जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जो अधिक ऊंचाई वाले रेगिस्तानों, ग्लेशियरों, बर्फ के मैदानों और नदी घाटियों के पार हैं।
श्री सिंह ने अभियान दल को सुरक्षित और सफल यात्रा के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस तरह के अभियान युवाओं में नेतृत्व क्षमता, मानसिक दृढ़ता, अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने चयनित कैडेटों की शारीरिक और मानसिक तैयारी की सराहना करते हुए कहा कि यह पदयात्रा उनके लिए दृढ़ता, आत्मविश्वास और आत्म-खोज का एक जीवन-स्मृति पाठ होगा। उन्होंने आशा व्यक्त की, “कैडेट परांग ला से न केवल यादगार अनुभव लेकर लौटेंगे, बल्कि अपनी आंतरिक शक्ति की गहरी समझ भी प्राप्त करेंगे।”
रक्षा मंत्री ने दल के सदस्यों से आग्रह किया कि वे पूरे अभियान के दौरान ‘सुरक्षा’, ‘पर्यावरण’ और ‘स्थानीय समुदायों के साथ संपर्क’ को प्राथमिकता दें। उन्होंने कैडेटों से कहा, “प्रशिक्षकों के निर्देशों का सख्ती से पालन करें, अनावश्यक जोखिमों से बचें और हिमालयी पर्यावरण की रक्षा के लिए कोई कचरा नहीं करने का दृष्टिकोण अपनाएं। स्थानीय समुदायों के साथ सम्मानपूर्वक जुड़ें, उनकी संस्कृति और परंपराओं को समझें और उनके अनुभवों से सीखें। यह अभियान आपके जीवन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनेगा और आपको जीवन के हर पड़ाव पर ‘अपराजिता’ बने रहने के लिए प्रेरित करेगा।”
इस अवसर पर एनसीसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स और एनसीसी एवं रक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। यह अभियान दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। भाबा-पिन घाटी क्षेत्र में तैयारी और अनुकूलन के लिए एक ट्रेक आयोजित किया गया, जिसके बाद योग्यता के आधार पर एनसीसी महिला कैडेटों की अंतिम टीम का चयन किया गया। इस अभियान का उद्देश्य एनसीसी महिला कैडेटों में नारी शक्ति, नेतृत्व, आत्मविश्वास, टीम वर्क, सहनशक्ति और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है।
